Gopalganj Court News : (सत्येंद्र पांडेय) गोपालगंज में करीब 20 वर्ष पुराने चर्चित बाल हत्या मामले में गोपालगंज की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. विजयीपुर थाना क्षेत्र के चखनी टोला सीता पट्टी में एक बच्चे की हत्या कर शव नदी में फेंकने के मामले में कोर्ट ने दो आरोपितों को दोषी करार देते हुए कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. साथ ही दोनों पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है.
जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सुनाया फैसला
जिला एवं सत्र न्यायाधीश-14 अमित कुमार पांडेय की अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद गांव के नंद किशोर सिंह और नरसिंह भगत को दोषी पाया. कोर्ट ने दोनों को कठोर उम्रकैद की सजा सुनाई. साथ ही आदेश दिया कि यदि अर्थदंड की राशि जमा नहीं की गई तो दोनों को एक-एक वर्ष की अतिरिक्त कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी.
सजा के बाद मंडल कारा भेजे गए दोषी
फैसला सुनाए जाने के बाद दोनों दोषियों को न्यायिक हिरासत में लेकर मंडल कारा गोपालगंज भेज दिया गया. मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक अनिल कुमार शर्मा ने पैरवी की, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता रामाश्रय सिंह ने दलीलें पेश कीं.
पूजा के दौरान लापता हुआ था मासूम
अभियोजन के अनुसार 9 अगस्त 2006 को गांव के स्वर्गीय रमाशंकर सिंह की पुत्री चौरमती देवी अपने भतीजे दीपक और दो भतीजियों रिंकू व पिंकू के साथ गांव के काली स्थान में पूजा करने गई थीं. इसी दौरान दीपक रोने लगा, जिसके बाद उसे घर भेज दिया गया.
रास्ते में भी बच्चा रोने लगा तो साथ गई बच्ची उसे छोड़कर वापस चली गई और परिजनों को इसकी सूचना दी. जब परिजन मौके पर पहुंचे तो दीपक गायब था.
Child Murder Case Gopalganj : पानी से बरामद हुआ था शव
परिजनों ने काफी खोजबीन की, लेकिन बच्चे का पता नहीं चला. बाद में दीपक का शव हाता सोता के पानी से बरामद हुआ. घटना के बाद बच्चे के पिता सुनील कुमार ने अज्ञात लोगों के खिलाफ विजयीपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी.
जांच में सामने आए आरोपितों के नाम
पुलिस अनुसंधान के दौरान खुलासा हुआ कि गांव के कुछ लोगों ने दीपक को रास्ते से ले जाकर उसकी हत्या कर दी थी और शव को पानी में फेंक दिया था. जांच के आधार पर कई लोगों को आरोपित बनाया गया, जिनमें से नंद किशोर सिंह और नरसिंह भगत के खिलाफ आरोप साबित होने पर अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया.
Bihar Crime News : 20 साल बाद मिला न्याय
करीब दो दशक तक चले इस मुकदमे के बाद आए फैसले को पीड़ित परिवार के लिए न्याय की बड़ी जीत माना जा रहा है. लंबे इंतजार के बाद अदालत के फैसले से मामले का कानूनी पटाक्षेप हो गया.
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