बउरहवा शिव मंदिर पर जलाभिषेक के लिए दोन से आते थे द्रोणाचार्य

हथुआ. हथुआ से आधा किलोमीटर पश्चिम बड़ा कोइरौली गांव में स्थित हजारों वर्ष पुराने ऐतिहासिक बउरहवा शिव मंदिर में सावन पर्व को लेकर प्रत्येक सोमवार को भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं.

हथुआ. हथुआ से आधा किलोमीटर पश्चिम बड़ा कोइरौली गांव में स्थित हजारों वर्ष पुराने ऐतिहासिक बउरहवा शिव मंदिर में सावन पर्व को लेकर प्रत्येक सोमवार को भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं. जानकार बताते हैं कि प्रखंड क्षेत्र में स्थित कुसौंधी तथा बड़ा कोईरौली का शिवालय काफी प्राचीन है. इसमें महाभारत काल के गुरु द्रोणाचार्य सीवान जिले के दोन में अवस्थित अपने आश्रम से पांडव शिष्यों के साथ प्रत्येक सोमवार को बउरहवा शिवलिंग पर जलाभिषेक करने आते थे. बउरहवा शिवालय से जुड़ीं कई चमत्कारी घटनाओं से प्रभावित राजतंत्र के जमाने में हथुआ राज परिवार ने मंदिर बनवाना शुरू किया. बताया जाता है कि शिवलिंग के ऊपर का गुंबज दिन में बनता था, तो रात में स्वत: गिर जाता था. ऐसे में सैकड़ों वर्ष पुराना यह शिवालय गुंबज विहीन ही रहकर श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है. ऐतिहासिक बउरहवा शिवालय के प्रति अपार श्रद्धा के कारण गोपालगंज के अलावा सीवान तथा सीमावर्ती क्षेत्र उत्तर प्रदेश के कई जगहों के श्रद्धालु श्रावण मास में गेरुआ वस्त्र धारण कर इटवा पुल के पास से दाहा नदी से जल भर इस शिवालय में जल चढ़ाते हैं. स्थानीय लोगों के श्रद्धा का आलम यह है कि शादी-विवाह जैसे तमाम मांगलिक अवसरों का पहला निमंत्रण पत्र बाबा बउरहवा के दरबार में रख कर मंगलकामना करते हैं.

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Author: ASHOK MISHRA

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