पांच वर्ष के बाद चुनावी सरगर्मी बढ़ने लगी है. चुनाव तपिश के बीच वार्ड में विकास की गणना संभावितों और वार्डवासियों के बीच हो रही है. चुनाव के समय वायदे हुए लेकिन विकास धरातल पर न उतरा. नतीजतन राह ताकतें पांच वर्ष बीत गये. न सड़क बनी न
शौचालय : विकास की राह ताकतें वार्ड वासी आगामी चुनाव में जहां सबक सिखाने को तैयार हैं वहीं संभावित भी मुद्दे तलाश रहे हैं. आगामी चुनाव में वार्ड का नारकीय हालात जहां मुद्दा बनेगा वही आरोप प्रत्यारोप का दौर अभी से जारी है.
दो दशक से जर्जर है सड़क
शहर होते हुए भी वार्ड संख्या 8 के हालात विकास के दौर में गांव से बदतर हैं. जमाने की बनी सड़क जर्जर है. नालियों और गलियों का पक्कीकरण तो आज तक हुआ ही नहीं. दलित बस्ती है लेकिन स्वच्छता अभियान के दौर में एक अदद शौचालय नहीं है. वार्डवासी विकास का इंतजार करते रहे, लेकिन उम्मीदों में दिन बीत गये. बरसात आते ही हालात सड़कों की बद से बदतर हो जाती है. सड़क, नाला के निर्माण की बात तो दूर सफाई भी यहां नहीं होती है.
नतीजतन सड़क पर जमा कचरे दुर्गंध फैलाते हैं और कुत्ता एवं सूअर धमाचौकड़ी मचाते हैं. सवाल यह है कि आखिर इसके लिए जिम्मेवार कौन है.
‘नाम का यह नगर पंचायत है. गांव से बदतर सड़क के हालात हैं. कचरा फैला रहता है, सफाई नहीं होती. नगर पंचायत का विकास क्या है आज तक पता नहीं चला बल्कि ग्राम पंचायत होता तो कुछ विकास हुआ रहता.
ढुनमुन प्रसाद, वार्ड वासी
‘होल्डिंग टैक्स ही नगर पंचायत का वासी होने की पहचान है. सड़क, नाला, गली, शौचालय का विकास नहीं हुआ है. एलइडी अभियान भी बाजार तक सिमट गया.
मनोज तिवारी, वार्ड वासी
वार्ड में विकास नहीं हुआ है. मैंने हर समस्या के निदान के लिए मांग की, लेकिन भेद भाव बरता जाता रहा. नतीजतन न सड़क बना न नाला. पूरा वार्ड समस्याओं से ग्रस्त है.
गायत्री देवी, वार्ड पार्षद, वार्ड 8
‘सड़क, नाली के निर्माण के लिए योजना बनी है. जल्द ही इसका काम शुरू होगा. टेंडर की प्रक्रिया की जा रही है. वार्ड का सर्वांगीण विकास किया जायेगा.
रेणु सिन्हा, कार्य. पदाधिकार, नप बरौली
