कालामटिहनिया : उत्तर प्रदेश के अहिरौलीदान से विशुनपुर तक पायलट चैनल का निर्माण कराने और गंडक नदी पर बांध बनाने का कार्य शुरू कराने की मांग को लेकर आठवें दिन भी सत्याग्रहियों का आंदोलन जारी रहा. आठवें दिन आंदोलनकारियों की स्थिति और बिगड़ गयी. वहां कैंप रही मेडिकल टीम भी वापस लौट गयी है. सत्याग्रहियों ने निर्माण कार्य चालू नहीं होने तक अनिश्चितकालीन पानी में रहने का एलान किया है. शुक्रवार को जल सत्याग्रह आंदोलन में दियारा इलाके की काफी संख्या में महिलाएं भी उतर गयीं.
जल सत्याग्रहियों के समर्थन में दियारा क्षेत्र की सैकड़ों महिलाएं भी वहां पहुंची हैं. आंदोलन में कुचायकोट प्रखंड के दुर्ग मटिहनिया, खेम मटिहनिया, कालामटिहनिया, भसही, सिपाया, अहिरटोली समेत कई गांव के ग्रामीण पहुंचे हैं. ग्रामीणों की भीड़ को देखते हुए विशंभरपुर थाने की पुलिस मौके पर कैंप कर रही है.
कलावती देवी, मंसूरिया देवी, सीता देवी, ज्ञाति देवी, पूनम देवी, रामावती देवी, सरिता देवी, सरली देवी, रिता देवी आदि महिलाओं ने बताया कि बांध के नहीं बनने से हर बार बाढ़ में घर उजड़ जाती है. इनका खेती-गिरहस्ती पहले से ही नदी में विलीन हो चुका है. दियारा इलाके के कई गांव नदी में समा चुके हैं.
शेष बचे गांव को गंडक नदी के कहर से बचाने के लिए जल सत्याग्रह आंदोलन 17 अप्रैल से शुरू किया है.आंदोलन में मुमताज अली, नाजीर अली, दिनेश शर्मा, राजेश छठु, असगर अली, राज वल्लवभ कुशवाहा, लोटन साह, सचिन सनेही, अवधेश, नरेंद्र ओझा, कृष्णा यादव, राजेश देहाती, सुमित, अजय कुशवाहा, मिथिलेश, रोशन साह आदि शामिल हैं.
