ऐयाशी खर्च जुटाने के लिए किया था अगवा

खुलासा. अपहरण कर एक करोड़ फिराैती मांगने की भाइयों ने रची थी साजिश बेतिया लेकर जाने की थी योजना, हुआ गिरफ्तार गोपालगंज : हाथों की कलाई में रक्षा सूत्र बांधनेवाली बहन का उसका भाई ही अपहर्ता बन सकता है. गोयल परिवार में यह किसी ने सोचा भी नहीं था. शांभवी अपने घर की इकलौती बेटी […]

खुलासा. अपहरण कर एक करोड़ फिराैती मांगने की भाइयों ने रची थी साजिश

बेतिया लेकर जाने की थी योजना, हुआ गिरफ्तार
गोपालगंज : हाथों की कलाई में रक्षा सूत्र बांधनेवाली बहन का उसका भाई ही अपहर्ता बन सकता है. गोयल परिवार में यह किसी ने सोचा भी नहीं था. शांभवी अपने घर की इकलौती बेटी है और दिव्यांक खुराना इकलौता बेटा. दोनों के पिता आपस में भाई हैं और इस शहर के बड़े कारोबारी भी हैं. दिव्यांक ने सेंट जोसेफ स्कूल से निकलने के बाद दोस्तों के साथ ऐयाशी का काम शुरू कर दिया. खर्च जुटाने के लिए ही उसने अपनी चचेरी बहन शांभवी के अपहरण की साजिश रच डाली. अपहरण में दिव्यांक खुराना ने बरौली की रहनेवाली प्रेमिका का इस्तेमाल किया. वह अपने दोनों वाहनों को लेकर थाना चौक पर पहुंचा.
शांभवी भी दिव्यांक की प्रेमिका को जानती थी. वह स्कूल बस से उतरने के बाद अपने भाई और उसकी प्रेमिका को देख कर स्कॉर्पियो में आराम से बैठ गयी. हजियापुर की तरफ स्कॉर्पियो चली गयी. स्कॉर्पियो में दिव्यांक के अलावा उसकी प्रेमिका दिव्या कुमारी, चालक ब्रजेश कुमार तथा मौसेरा भाई अमन कुमार भी बैठा था. इधर, परिजनों के पास एक घंटा बाद ही अपहरण कर लिये जाने की खबर धमकी के साथ मिली. परिजनों ने अपहरण की सूचना तत्काल पुलिस अधीक्षक रविरंजन कुमार को दी. एसपी ने कॉल लोकेशन तथा सीसीटीवी फुटेज में कैद वारदात के आधार पर कार्रवाई शुरू कर दी. मांझा के मंगूरहा से शांभवी के मिलने के बाद दिव्यांक की साजिश खुल कर सामने आयी. दिव्यांक के पास फिलहाल स्कॉर्पियो और रिस्टोन गाड़ी है. एक सप्ताह पहले ही उसने ऑडी कार के लिए ऑर्डर भी दिया था. फिरौती की रकम से ऐयाशी का खर्च निकालना था, इसलिए उसने अपनी चचेरी इकलौती बहन का अपहरण करने की योजना बनायी. पुलिस के समक्ष दिव्यांक ने अपने गुनाह को कबूल किया.
रिश्तों से उठ गया विश्वास : अपहरण के लिए प्रेमिका का किया था इस्तेमाल
अपहरण के बाद शांभवी के घर पहुंच गया था दिव्यांक
बहन का अपहरण करने के बाद दिव्यांक खुराना शांभवी के घर पर पहुंच गया. परिजनों की गतिविधियों को लेकर अपहर्ताओं को पल-पल अवगत करा रहा था. शांभवी के पिता प्रदीप गोयल के साथ दिव्यांक ने ही थाने पर पहुंच कर पुलिस को अगवा होने की खबर दी थी. सांसद जनक राम जब शांभवी के घर पहुंचे तो दिव्यांक ने ही वारदात और अपराधियों से फिरौती मांगने की पूरी कहानी बतायी. यहां तक की परिजनों पर फिरौती की राशि देने के लिए दबाव भी दिव्यांक खुराना ने बनाया था.
शांभवी को बेहोश करने के लिए ले गये थे इथर
अपहरण करने के बाद शांभवी को बेहोश करने की योजना थी. इसके लिए अपहर्ता ईथर और एक जहरीला पदार्थ भी लेकर गये थे, जिसे पुलिस ने बरामद भी कर लिया है. एसपी ने बताया कि दिव्यांक खुराना ने ईथर से शांभवी को बेहोश कर रखने के लिए कहा था. लेकिन, उसकी प्रेमिका दिव्या ने ऐसा नहीं किया.
अपहरण से पहले उतार दिया था नंबरप्लेट
शांभवी का अपहरण करने से पहले अपहर्ताओं ने स्कॉर्पियो गाड़ी का नंबर प्लेट इसलिए उतार दिया था कि इसकी जानकारी किसी को न हो सके. लेकिन, सीसीटीवी फुटेज में पूरी वारदात कैद हो गयी है. पुलिस को इस कांड का खुलासा करने में सबसे बड़ी सफलता सीसीटीवी फुटेज से ही मिली है. सीसीटीवी में साफ-साफ शांभवी दिखायी दे रही थी. डीएवी स्कूल की बस से उतरने के बाद सामने खड़ी उजले रंग की स्कॉर्पियो में शांभवी जाकर बैठ रही है.
फिरौती मांगने के लिए जेपी
ने दिया था सिम
अपहरण के बाद फिरौती की रकम मांगने के लिए साधु चौक के निवासी जयप्रकाश चौरसिया ने ही सिम मुहैया कराया था. जेपी से मिले सिम कार्ड से ही अपहर्ताओं ने शांभवी के पिता के पास कॉल करके एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी. हालांकि पुलिस ने सबसे पहले जेपी को ही चंद्रगोखुला रोड से गिरफ्तार किया था. जेपी की गिरफ्तारी के बाद अन्य सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया.
दिव्यांक का दूसरा चालक चंदन फरार
दिव्यांक खुराना का दूसरा चालक चंदन कुमार फरार है. पुलिस ने एक ड्राइवर को गिरफ्तार किया है, जबकि दूसरा चालक चंदन कुमार फरार है. नगर थाना इंस्पेक्टर बालेश्वर राय के नेतृत्व में पुलिस टीम चंदन की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है. चंदन के घर के अलावा सगे-संबंधी और रिश्तेदारों के यहां छापेमारी की गयी, लेकिन कहीं से उसका कोई सुराग नहीं मिल सका.
पुरस्कृत किये जायेंगे पुलिस अधिकारी : एसपी
छात्रा का अपहरण के बाद कुछ ही घंटे में सकुशल बरामद होने तथा अपहर्ताओं की गिरफ्तारी होने पर एसपी ने पुरस्कृत किये जाने के लिए मुख्यालय को लिखा है. एसपी रविरंजन कुमार ने बताया कि अपहरणकांड में पुलिस अधिकारियों के एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया था जिसमें सदर एसडीपीओ मनोज कुमार, नगर इंस्पेक्टर बालेश्वर राय, मांझा के थानाध्यक्ष रामसेवक रावत, नवीन कुमार, संतोष कुमार, प्रेमप्रकाश राय, ब्रजेश कुमार को शामिल किया गया था.
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