गोपालगंज : नववर्ष की स्वागत के लिए अपने दोस्तों, प्रेमियों, चाहने वालों को ग्रीटिंग भेज कर अपने दिल की बात कही जाती थी. दिसंबर के पहले सप्ताह से ही ग्रीटिंग की खरीदारी कर दूर रहनेवालों को डाकघर, कोरिया से ग्रीटिंग भेजे जाने की परंपरा रहा है. यह परपंरा भी अब समाप्ति की ओर है. दुकान में ग्रीटिंग खरीदनेवालों का इंतजार है. कोई ग्रीटिंग लेने नहीं जा रहा है. दरअसल बड़े शहरों जैसा ही अपने शहर में अधिकतर लोगों के पास एंड्रायड मोबाइल हो चुके हैं. बीते वर्ष की अपेक्षा इस तरह के मोबाइल उपभोक्ता की संख्या काफी वृद्धि हुई है. बाजारों में ग्रीटिंग कार्ड खरीदनेवाले और बेचनेवालों की भी कमी देखी जा रही है. दुकानदारों का कहना है कि व्हाट्सप के दुनियां में कार्ड के महत्व, कार्ड में लिखे भाव को ही खत्म करता जा रहा है.
अगर किसी व्यक्ति को एक दूसरे को कार्ड देने का इच्छा भी होती है, तो लोगों को दर दर दुकानें भटकना पड़ता है. शंभु प्रेस के संजय सिंह ने बताया कि प्रेस तो शादी विवाह के कार्ड, उपहार के भरोसे ही चल रहा है. फेसबुक, व्हाट्सएप जैसे सोशल साइट्स आने की वजह से ही इसका क्रेज कम होता जा रहा है. डिजिटल लैब के कार्ड विक्रेता ने बताया कि कस्टमाइज कार्ड की मांग बढ़ी है. इस तरह के कार्ड में देनेवाले का नाम मुद्रित कर के ही दिया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में कार्ड का क्रेज अभी भी शहरों की तुलना में अधिक है.
