गंडक नदी में साल-दर-साल बाढ़ और कटाव से तबाही का मामला लोकसभा तक पहुंचा. सांसद ने इस मामले को उठाते हुए सरकार से पहल करने की अपील की. इस पर विभागीय मंत्री ने 24. 565 करोड़ रुपये के आवंटन की स्वीकृति देने की बात कही है.
गोपालगंज : गंडक नदी के कटाव से तबाह हो चुकी कालामटिहनिया पंचायत व जिले के 40 गांवों की स्थिति को देखते हुए सांसद जनक राम ने लोकसभा में इस मामले को उठाते हुए तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की. सांसद ने बताया कि यूपी के अहिरौली दान से विशुनपुर तटबंध तक बांध का निर्माण प्रक्रियाधीन है. 30-40 गांवों को बाढ़ की भयावह स्थिति का सामना इनको करना पड़ता है. डेढ़ लाख से अधिक लोग कुप्रभावित होते हैं. कटाव से अब तक पिछले कई वर्षों से 15-20 हजार घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं. लोग नहर की पटरी और सड़क के किनारे गुजर-बसर कर रहे हैं. उपजाऊ जमीन कटाव के कारण बरबाद हो रही है. कृषि योग्य भूमि नदी में समाने से भारी क्षति हो रही है. नदी केा सिल्ट की सफाई कर बाढ़ एवं कटाव से बचाने के लिए वाल्मीकिनगर से सोनपुर तक पायलट चैनल की मांग की गयी.
गंगा संरक्षण राज्य मंत्री ने दिया जवाब : जल संसाधन नदी विकास, गंगा संरक्षण राज्य मंत्री डॉ संजीव कुमार बलियान ने कहा कि गंडक नदी नेपाल सीमा के निकट तिब्बत में धौलगिरी से निकल कर यूपी के महाराजगंज, कुशीनगर, बिहार के पूर्वी चंपारण, पं चंपारण, गोपालगंज, वैशाली, मुजफ्फरपुर जिले से होकर गुजरती है.
640 किमी में 260 किमी भारत में रेंज है. 2015 में गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग ने वाल्मीकिनगर वन की सुरक्षा के लिए कटावरोधी कार्य नामक स्कीम का तकनीकी आर्थिक मूल्यांकन करा लिया है एवं अनुमानित लागत 24.565 करोड़ की स्वीकृति दे दी गयी है.
सांसद ने की पहल : नदी के कटाव को रोकने के लिए गंगा जल आयोग की तरफ से राशि का आवंटन किया जा चुका है. सांसद जनक राम ने जल संसाधन विभाग से अपील की है कि तत्काल बांध के निर्माण में तेजी लायी जाएं, ताकि बाढ़ से पूर्व इसका निर्माण पूरा हो सके.
सांसद के प्रश्न पर सरकार का जवाब
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