गोपालगंज : मनरेगा की रोजगार गारंटी योजना भी मजदूरों का सपना तोड़ रही है. ऐसे तो मनरेगा का उद्देश्य सभी जॉब कार्डधारियों को रोजगार मुहैया कराया जाना है. इसके तहत पंचायतों में मनरेगा की योजना संचालित की जाती है, ताकि उस पंचायत के सभी जॉब कार्डधारियों को रोजगार मिल सके. रोजगार नहीं मिलने पर जॉब कार्डधारी पंचायत रोजगार सेवक के यहां आवेदन देकर रोजगार की मांग करते हैं, लेकिन गरीबों को रोटी देनेवाली मनरेगा योजना से भी मजदूरों का सपना टूटने लगा है.
जिले की 234 पंचायतों में जॉब कार्डधारी मजदूरों की संख्या 1156357 है. इनका निवाला मुख्य रूप से मजदूरी कार्य पर ही टिका हुआ है. ऐसे में इन मजदूरों को काम करने के बाद मजदूरी के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है. वित्तीय वर्ष 2015-16 में जॉब कार्डधारी मजदूरों के द्वारा मनरेगा योजना में कार्य किया गया. उन्हें विश्वास था कि काम समाप्त होने के साथ ही उनके खाते में मजदूरी की राशि पहुंच जायेगी, लेकिन काम समाप्त होने की बात कौन कहे वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद भी मजदूरी का भुगतान नहीं हो सका है.
ऐसे में मजदूर पहले मनरेगा के कार्य के लिए मुखिया जी और पीआरएस के यहां चक्कर लगा रहे थे, अब भुगतान के लिए बैंक और मुखिया के दरवाजे का चक्कर लगा रहे है. सदर प्रखंड के मनरेगा मजदूर सुकई भगत बताते हैं कि काम किये लगभग दो वर्ष बीत गये, लेकिन अब तक भुगतान नहीं हुआ. अभी विभाग में मनरेगा मजदूरों के 88.8 लाख की राशि बकाया है.
