बैंक में पहुंच कर ग्राहक कर रहे गाली-गलौज
गोपालगंज : कैश आउट का सबसे गंभीर असर उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक की शाखाओं पर पड़ा है. ग्रामीण बैंक की 64 शाखाओं में से 60 शाखा में कैश नहीं है. पिछले नौ नवंबर से कैश के अभाव में प्रतिदिन ग्राहकों को कोप भाजन के शिकार बैंक अधिकारी बन रहे हैं. आरबीआइ बैंक अधिकारियों का नहीं सुन रहा. नतीजा है कि उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक यूनाइटेड फोरम के पदाधिकारियों ने रिजिनल मैनेजर का घेराव किया. अपनी समस्याओं को सुनाते हुए फोरम ने कहा कि बैंक की शाखा में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मियों की जान पर खतरा है. ग्राहकों की समस्या सुनने के बाद भी उनका भुगतना नहीं कर पाने की स्थिति में उनके द्वारा गाली-गलौज की जा रही है. जान मारने की धमकी दी जा रही है.
फोरम ने स्पष्ट किया कि अगले दो दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों की शाखाओं में कैश उपलब्ध नहीं हुआ, तो सभी बैंक कर्मी सामूहिक अवकाश पर जाने को बाध्य होंगे. लीड बैंक, आरबीआइ द्वारा आये दिन शाखा में पर्याप्त नकदी उपलब्ध होने की सूचना अखबारों में छपवायी जा रही है. अखबारों को पढ़ कर ग्राहक प्रतिदिन इस उम्मीद में आते है कि उनको पैसा का भुगतान मिल जायेगा. लेकिन भुगतान नहीं मिलने से वे आक्रोशित हो रहे हैं. उत्पन्न स्थिति में कभी भी अप्रिय घटना किसी भी बैंक अधिकारी के साथ हो सकती है. इसकी पूरी जवाबदेही प्रबंधन की होगी. मौके पर फोरम के अधिकारी सुरेंद्र पांडेय, रवींद्र कुमार मिश्र, विनोद कुमार मिश्र, मनमोहन प्रसाद सिन्हा, मंजय कुमार तिवारी, संजय कुमार तिवारी, एमके सिंह समेत कई पदाधिकारी मौजूद थे.
ग्रामीण बैंक कर्मी सड़क पर उतरने को होंगे विवश : जिला यूनाइटेड फोरम ऑफ ग्रामीण बैंक ने चेतावनी दिया है कि आरबीआइ अगर ग्रामीण बैंक को कैश उपलब्ध नहीं कराता है तो बैंक कर्मी सड़क पर उतरने को विवश होंगे.
यूनियन के संयोजक सह ग्रामीण बैंक के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुशील कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल कुमार सिंह से मिल कर नोटबंदी अभियान के तहत विगत 12-13 नंवबर के कार्य दिवस के भुगतान पर चर्चा की. कैश उपलब्ध के लिए आरबीआइ और सेंट्रल बैंक के प्रबंधन से लगातार प्रयास किये जाने की बात अनिल सिंह ने बतायी. जिले के 25 बैंकों की 169 शाखाएं उपलब्ध हैं, जिसमें 64 ग्रामीण बैंक भी हैं. इनको पैसा नहीं मिलने से सबसे अधिक परेशानी ग्रामीण इलाके के ग्राहकों को हो रही है.
गोपालगंज. खेत तैयार कर किसान बोआई की बाट जोह रहे हैं. खाद- बीज आये कहां से ? कृषि विभाग द्वारा लगाये गये बीज वितरण कैंप में सन्नाटा है. न कैंप में बीज बिक रहा है और न बाजार में. कारण है बड़े नोट. नोट बंदी ने खेती को पूरी तरह अपनी आगोश में लेते हुए प्रभावित कर डाला है. आंकड़े गवाह हैं कि इस बार रबी अभियान फ्लॉप होने के कगार पर है.
अन्य वर्षों में नवंबर माह में जहां 80 फीसदी बोआई होती थी, वहीं इस बार अब तक महज 22 फीसदी हो पायी है. सरकारी बीज वितरण का हाल बुरा है. अब तक महज 20 फीसदी ही बीज बिके हैं. ऐसे में सवाल यह है कि बोआई कब होगी ? नोट की समस्या फिलहाल मिटने वाली नहीं है.
एक सप्ताह के बाद विपरीत होगा मौसम : गेहूं बोआई और बीज जमने के लिए 12 से 17 डिग्री सेल्सियस का तापमान उपयुक्त माना गया है. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार एक सप्ताह में तापमान में गिरावट आयेगी, जो रबी बोआई के लिए प्रतिकूल होगी. उस समय बोआई करने पर जहां जमता में कमी आयेगी, वहीं फसल का ग्रोथ रेट भी घटेगा. ऐसे में इस वर्ष रबी के उत्पादन में भारी गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
कम बोआई के क्या हैं कारण
निर्धारित समय पर नहीं लगा कैंप
खाते में अनुदान के भुगतान ने भी बीज वितरण को किया प्रभावित
नोटबंदी के साथ किसानों के लिए नहीं की गयी वैकल्पिक व्यवस्था
क्या कहता है कृषि विभाग
नोट बंदी के कारण बोआई लक्ष्य से कम हुई है. बीज की बिक्री नहीं के बराबर हो रही है. प्रयास किया जा रहा है कि किसान बोआई करें.
सुरेश प्रसाद, डीएओ, गोपालगंज
