डीएलसीसी की बैठक में बैंक अधिकारियों को डीएम ने दिया निर्देश
रजिस्टर्ड दुकानों पर आयकर विभाग लगवायेगा पॉश मशीन
गोपालगंज : जन-धन के खाताधारियों को तत्काल रूपे कार्ड उपलब्ध कराया जायेगा. इसके लिए खाताधारी अपने बैंक शाखा से संपर्क कर रूपे कार्ड ले लें. साथ ही पिन कोड को एक्टिवेट करायें.
बैंक अधिकारियों के साथ डीएलसीसी की बैठक करते हुए डीएम राहुल कुमार ने बैंक अधिकारियों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि नोटबंदी के बाद कई बैंकों के द्वारा मनमानी किये जाने की बात सामने आयी है. उसे ठीक किया जाये. अन्यथा कार्रवाई होगी. बैठक में मौजूद आयकर विभाग के सहायक आयुक्त ने कहा कि गोपलगंज में छह हजार दुकान आयकर के तहत रजिस्टर्ड हैं. इन दुकानों में पॉश मशीन प्रोवाइड कराने के लिए व्यवस्था की जा रही है, ताकि पूरी तरह से कैश लेस व्यवसाय हो. कैश लेस व्यवसाय से पूरी तरह से समस्या का समाधान हो जायेगा. बैंकों पर भी लोड कम होगा. इसके साथ ही डीएम ने सभी बैंकों को निर्देशित किया है कि हर हाल में किसानों को 25 हजार रुपये का भुगतान उनके केसीसी से किया जाये ताकि उनके खेती बारी में किसी तरह की परेशानी न हो. केसीसी में हो रही परेशानी के कारण फसल पर असर न पड़े. इसका ध्यान रखा जाये. डीएलसीसी की बैठक में आरबीआइ से आने वाले कैश का रिव्यू भी डीएम ने किया ताकि कहीं भी कैश के अभाव में कानून व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो.
ग्रामीण बैंक के ग्राहकों को धैर्य रखने की अपील : लीड बैंक केेे प्रबंधक अनिल कुमार ने डीएम को बताया कि ग्रामीण इलाके में सर्वाधिक शाखा उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक की हैं. उनको पर्याप्त राशि नहीं मिल पा रही, जिसके कारण समस्या बनी हुई है. ग्राहकों का आक्रोश कई बार देखा जा रहा. इस पर डीएम ने ग्राहकों से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि आरबीआइ को पत्र लिखा गया है. जल्द ही ग्रामीण बैंक को उनकी आवश्यकता के अनुरूप कैश उपलब्ध कराया जायेगा. इस स्थिति में बैंक को सहयोग करने की जरूरत है. किसी भी तरह की समस्या उत्पन्न होने पर तत्काल जानकारी जिला प्रशासन को दें.
जन-धन के खाते की हो रही मॉनीटरिंग : जन -धन के खाते में 50 हजार रुपये तक जमा होना है. इन खातों को जीरो बैलेंस से खोला गया था. अचानक नोटबंदी के बाद इन खातों में 50 हजार रुपया कहां से आ गये. इसकी भी पड़ताल हो रही है.
वैसे खाता, जो खुलने के बाद हजार दो हजार तक सिमट कर रह गये थे. आज उनमें 50 हजार रुपया का जमा होना संदिग्ध माना जा रहा. वित्त विभाग का मानना है कि ब्लैक मनी को मजदूरों के खाते में जमा करा कर उसे व्हाइट मनी के रूप में बदलने का प्रयास हो सकता है जिस पर आयकर विभाग नजर रखे हुए है.
