हेल्पलाइन नंबर पर जानकारी लेते रहे परिजन
रेलवे ने कहा-हादसे में जिले के यात्री नहीं थे शामिल
स्कूल, कॉलेज, आंगनबाड़ी केंद्र पर कटाव का खतरा
कालामटिहनिया : कुचायकोट प्रखंड की विशंभरपुर पंचायत में गंडक नदी का कटाव बेकाबू हो गयी है. नदी तेजी से कटाव करती हुई बांध की तरफ शिफ्ट करती जा रही है. इससे लोगों में अफरातफरी मची है. पिछले 24 घंटे में 50 एकड़ से अधिक गन्ने के खेत नदी में समा चुके हैं. आंगनबाड़ी केंद्र, हाइस्कूल, कॉलेज पर कटाव चल रहा है. कटाव से खतरे को देखते हुए यहां रहनेवाले लगभग 50-60 परिवार अपने घरों को तोड़ने में लगे हुए हैं. नदी का रुख को देख लोग अपने हाथों से बनाये गये आशियाने को तोड़ कर फुटपाथ पर आ रहे हैं. प्रशासन की तरफ से कटाव को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा.
गांव के कमेलश्वर तिवारी, हरिहर तिवारी, शकुंतला देवी, सुनपति देवी आदि का कहना है कि प्रशासन ने हमें अपने हाल पर छोड़ दिया है. न तो कटाव को रोकने के लिए कोई उपाय किया जा रहा और न ही बेघर हुए लोगों की सुधि ली जा रही है. लोग जहां-तहां फुटपाथ पर रात गुजार रहे हैं.
जानलेवा बनी ठंड की रात : कालामटिहनिया पंचायत में अब तक 600 परिवार बेघर हो चुके हैं. नदी के कटाव से बेघर हुए लोगों के लिए ठंड की रात जानलेवा बन गयी है. रात भर आग के सहारे जाग कर बिताना पड़ रहा. गांव के सरस्वती देवी ने बताया कि सड़क के किनारे रात जाग कर इसलिए बिताना पड़ रहा कि जंगली जानवरों का खतरा बना हुआ है.
जमीनदारों की रात स्कूल में कट रही : आप यकीन नहीं करेंगे, लेकिन बात सोलह आने सच है. विशंभरपुर के रहनेवाले जमींदार लोग जो कल तक अपने यहां दर्जन भर मजदूरों को रोजगार देने का काम करते थे आज नदी के कोप के शिकार होकर स्कूल में रात बिता रहे हैं. स्कूल में फुटपाथ का जीवन जी रहे हैं. पॉलीथिन के नीचे उनका अलग-अलग कुनबा बदहाली की दास्तां को बयां कर रहा. प्रशासन की तरफ टकटकी लगाये ये परिवार इस इंतजार में हैं कि कटाव और बाढ़ का मुआवजा मिले, ताकि कहीं रहने का ठिकाना बना सके.
विशंभरपुर में गंडक नदी का कटाव बेकाबू, स्कूल और सड़क बनी सहारा
24 घंटे में 50 एकड़ गन्ने के खेत नदी में समाये
