कानूनी अड़चन . विभिन्न थानों में चोरी, लूट, डकैती के जब्त हैं करोड़ों रुपये
गोपालगंज : हजार, पांच सौ रुपये के नोट बंद होने से सभी चितिंत हैं. लेकिन, थानों के मालखानों में चोरी, लूट, डकैती जैसे मामलों में जो रुपये पुलिस अपराधियों के कब्जे से बरामद कर सजा दिलाने के लिए बतौर सबूत सील करके रखती है. अब उन रुपयों का क्या होगा. यदि 31 मार्च 2017 तक मुकदमों का फैसला हो भी गया तो कानून के हिसाब से सबूत को 30 दिनों तक सुरक्षित रहने का प्रावधान है. उसके बाद रुपयों का मूल्य क्या रह जायेगा. गोपालगंज में 21 थानों के मालखानों में करोड़ों रुपये जमा हैं. हाल ही में महम्मदपुर, मांझा समेत कई थानों में पुलिस ने लूट की रकम के साथ अपराधियों को गिरफ्तार किया था. उनके पास से लूट का माल भी बरामद हुआ. कई पीड़ितों ने रुपये लेने के लिए अर्जी दी है. लेकिन अभी भी कुछ लोगों को रुपये नहीं मिल सके हैं.
केस प्रोपर्टी (करेंसी) का निस्तारण मुकदमे के अंत में होता है : सिविल कोर्ट के अधिवक्ता रवि प्रकाश मणि त्रिपाठी ने कहा कि अगर कोई करेंसी बरामद होती है तो इसे केस प्रोपर्टी माना जाता है. केस प्रोपर्टी का निस्तारण मुकदमे के अंत में किया जाता है. मुकदमे का फैसला करते समय कोर्ट यह फैसला भी देती है कि जो करेंसी बरामद हुई है वह मुलजिम की है या वाकई में आपराधिक वारदात की है. लेकिन इन दोनों के तय होने में घटना के बाद से वर्षों गुजर जाते हैं. इतने दिनों तक यह करेंसी थाने के मालखाना में और एक सीमा से अधिक होने पर ट्रेजरी में सुरक्षित रखी जाती है. अगर कोर्ट पीड़ित के पक्ष में इसे रिलीज भी कर देती है तो उसे वापस कर दिया जाता है.
इनका कहना है
इसका फैसला कोर्ट करेगी. अगर कोर्ट पीड़ित को बरामद रुपये वापस करने का फैसला सुनाती है तो उसे रुपये वापस कर दिया जायेगा. सरकार की ओर से उस वक्त की करेंट करेंसी ही दी जायेगी.
रवि रंजन कुमार, एसपी
सबूत के तौर पर सील कर मालखानों में रखती है पुलिस
