सासामुसा : नारायणी नदी की त्रासदी पर आस्था भारी पड़ी. नारायणी नदी के कोप से पांच सौ से अधिक परिवार बेघर कर चुके हैं. नदी ने इन्हें फुटपाथ पर लाकर खड़ा कर दिया है. फिर भी इनकी आस्था तनिक भी कम नहीं हुई. छठ घाट पर आस्था और अटूट भरोसे के साथ व्रती अाराधना में तल्लीन रहे. विशंभरपुर तिवारी टोला नदी में समा जाने के बाद यहां पॉलीथिन के नीचे गुजर कर रहे लोगों के कुनबे से छठ के गीत निकल रहे थे
अधिकतर घरों की महिलाओं ने उपवास रख कर नारायणी से प्रार्थना की कि वे अपने कोप को शांत करें. विशंभरपुर की कलावती देवी ने बताया कि नदी ने जिस प्रकार पूरे परिवार को तबाह कर दिया है.
घर में पूजा की सामग्री खरीदने लायक भी नहीं छोड़ी. बगल में पिछले 35 वर्षों से छठ व्रत कर रही निर्मला देवी ने बताया कि कभी कल्पना भी नहीं की थी कि तीन मंजिला मकान तोड़ कर पॉलीथिन के नीचे रहना होगा. भगवान भी भक्तों का परीक्षा लेते हैं. कब तक परीक्षा लेंगे. हम हर परीक्षा से गुजरने के लिए तैयार है.यह सिर्फ इनका ही दर्द नहीं बल्कि यहां सैकड़ों व्रतियों का अलग-अलग दर्द है. लेकिन, छठपूजा पर कोई असर नहीं दिखा.
