मजहब से दूर आस्था में सब समाहित

महम्मदपुर : चौक से सटे दक्षिण पांडेय टोला की बगल में है 40 घरों की मुसलिम बस्ती. यहां छठ के गीत गूंज रहे हैं. लगभग एक दर्जन घरों में गेहूं सुखाये जा रहे हैं. अकबर मियां की पत्नी शैबुन नेशा गीत गाते हुए गेहूं सूखा रही हैं. बताती हैं,छठ मइया धर्म में नहीं बंटी हैं. […]

महम्मदपुर : चौक से सटे दक्षिण पांडेय टोला की बगल में है 40 घरों की मुसलिम बस्ती. यहां छठ के गीत गूंज रहे हैं. लगभग एक दर्जन घरों में गेहूं सुखाये जा रहे हैं. अकबर मियां की पत्नी शैबुन नेशा गीत गाते हुए गेहूं सूखा रही हैं. बताती हैं,छठ मइया धर्म में नहीं बंटी हैं. वे सबकी हैं. कुछ ऐसा ही हाल है बगल के घर में सोबराती मियां की पत्नी नजमा खातून का.

वे बताती हैं कि मैं 15 साल से लगातार छठ कर रही हूं. इन्हीं की आस्था से हमें पुत्र की प्राप्ति हुई है. वह कहती हैं कि हमें राम और रहीम दोनों प्यारे हैं. आसिफ हुसैन छठपूजा को किसी चमत्कार से कम नही मानते. चार बेटियों के बाद मन्नत मांगने पर उन्हें पुत्र हुआ. इस मुहल्ले के अकबर मियां कहते हैं कि मजहब को हम सीमा में नहीं बांध सकते.

सबसे पहले हमारा हिंदुस्तान प्यारा है और प्यारे हिंदुस्तान में हमें राम और रहीम दोनों ही प्यारे हैं.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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