आस्था . नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय महापर्व छठ आज से
सूर्योपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ शुक्रवार से नहाय-खाय के साथ शुरू होगा. गुरुवार को व्रती बाजार में कद्दू की खरीदारी करते देखे गये. शनिवार को व्रती खरना का प्रसाद ग्रहण करेंगे.
गोपालगंज : भगवान सूर्य की उपासना का लोकपर्व सूर्य षष्ठी (डाला छठ) कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि को मनाया जाता है. मूलत: यह चार दिन का पर्व होता है. इसकी शुरुआत कार्तिक शुल्क चतुर्थी तिथि से होती है. इस बार सूर्य षष्ठी व्रत की शुरुआत चार नवंबर से नहाय-खाय से हो रही है. पांच नवंबर को खरना, छठ नवंबर को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ व सात नवंबर को उदीयमान भास्कर को अर्घ दिया जायेगा. भठवा के पंडित अमित शास्त्री के अनुसार इस व्रत में स्वच्छता व पवित्रता पर विशेष ध्यान दिया जाता है.
प्रथम दिन व्रती नित्य क्रिया से निवृत्त हो इस व्रत का संकल्प लेकर पवित्रता के साथ एक समय के भोजन में शुद्ध देशी घृत मिला अरवा चावल व लौकी की सब्जी का सेवन करते हैं. दूसरे दिन खरना में रात्रि में दूध से बना खीर व रोटी का प्रसाद लेते हैं. तीसरे दिन निर्जला उपवास कर अस्ताचलगामी सूर्य को दूध व गंगाजल से अर्घ देने का विधान है. अंतिम दिन उदीयमान सूर्य को अर्घ देकर भगवान सूर्य की आराधना कर व्रत का पारन किया जाता है. पुत्र के दीर्घायु व महिलाओं को पुत्र की प्राप्ति के लिए यह सूर्य षष्ठी व्रत युगों से किया जाता रहा है.
हमारे यहां सूर्य षष्ठी व्रत या छठ मूलत: आराधना का पर्व है. इसमें अस्ताचल व उदीयमान सूर्य को अर्घ देने की परंपरा के पीछे सबसे बड़ा कारण सूर्य की शक्तियों का मुख्य स्रोत उनकी पत्नी उषा और प्रत्युषा है. छठ पर्व पर सूर्य के साथ दोनों शक्तियों की आराधना होती है. वर्ष भर सूर्य की आराधना के कई पर्व आते हैं, लेकिन डाला छठ ही एक ऐसा पर्व होता है जिसमें सूर्य की शक्तियों के साथ इनकी आराधना की जाती है. इस व्रत की शुरुआत महाभारत काल में मिलता है. जब सर्वप्रथम कुंती ने सूर्य की आराधना की थी.
सूर्यदेव के आशीर्वाद से ही कुंती को ओजस्वी, तेजस्वी, वीर पुत्र कर्ण प्राप्त हुआ था. कर्ण ने भी भगवान सूर्य की आराधना की. भगवान भास्कर के आशीर्वाद से ही वह परम योद्धा बना.ज्योतिष शास्त्र में पंचम भाव पुत्र का भाव माना जाता है. यहां पर काल पुरुष की पांचवीं राशि सिंह राशि का अाधिपत्य होता है. इसके स्वामी ग्रह भगवान सूर्य को माना जाता है.
संतान बाधा होने पर कुंडली में कहीं-न-कहीं ग्रह राशि पीड़ित या कमजोर होते हैं इसलिये ज्योतिष शास्त्र में संतान प्राप्ति के लिए सूर्य को अर्घ, रविवार का व्रत, अलोना व्रत, हरिवंश पुराण का श्रवण तथा सूर्य उपासना का महत्व बताया गया है. वर्ष भर में सूर्योपासना के लिए छठ-सात पर्व पड़ते हैं. वे सभी पुत्र की कामना के लिए होते हैं. कार्तिक मास भर सूर्य को अर्घ देने व विशेष कर षष्ठी के दिन अर्घ दान से सूर्य देव प्रसन्न होकर पुत्र रत्न प्राप्ति का आशीर्वाद देते हैं.
खरीदारी करते लोग.
महत्वपूर्ण तथ्य
वृद्धि : इस बार कार्तिक शुक्ल पक्ष में पंचमी तिथि की वृद्धि है
चार नवंबर : चतुर्थी तिथि भोर 5.39 से पंचमी तिथि (नहाय-खाय)
पांच नवंबर: पंचमी तिथि सुबह 6:56 मिनट तक, 6.56 षष्ठी तिथि (खरना)
छठ नवंबर : षष्ठी तिथि सुबह 7.47 से सप्तमी तिथि (निर्जला व्रत व अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ )
सात नवंबर : सप्तमी तिथि सुबह 8.06 मिनट तक (उदीयमान सूर्य को अर्घ व व्रत का पारन)
