स्कूल के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा

गड़बड़झाला . बथनाकुटी संस्कृत विद्यालय की कमेटी बनाने में फर्जीवाड़ा भारतीय संस्कृति का प्रतीक बथनाकुटी स्थित राधा कृष्ण संस्कृत उच्च विद्यालय की कमेटी के निर्माण में फर्जीवाड़ा सामने आया है. फर्जीवाड़ा सामने आते ही ग्रामीणों ने स्कूल के अस्तित्व को बचाने के लिए मुहिम शुरू की है. कुचायकोट : यूपी केकी सीमा बथनाकुटी स्थित संस्कृत […]

गड़बड़झाला . बथनाकुटी संस्कृत विद्यालय की कमेटी बनाने में फर्जीवाड़ा

भारतीय संस्कृति का प्रतीक बथनाकुटी स्थित राधा कृष्ण संस्कृत उच्च विद्यालय की कमेटी के निर्माण में फर्जीवाड़ा सामने आया है. फर्जीवाड़ा सामने आते ही ग्रामीणों ने स्कूल के अस्तित्व को बचाने के लिए मुहिम शुरू की है.
कुचायकोट : यूपी केकी सीमा बथनाकुटी स्थित संस्कृत उच्च विद्यालय की ख्याति इस लिए भी बढ़ जाती है कि मुसलिम घर की लड़कियां भी वेद की पढ़ाई करती हैं. हिंदू और मुसलिम बच्चे और बच्चियां एक साथ वेद मंत्रों का उच्चारण करते हैं. इस विद्यालय के तत्कालीन प्राचार्य ने रिटायर होने से पूर्व कागज में पुरानी कमेटी को भंग करते हुए नयी कमेटी का गठन कर दिया तथा नयी कमेटी में वैसे लोगों को शामिल किया गया जिनको विद्यालय के विकास से कोई मतलब नहीं है.
नयी कमेटी का वर्क सिर्फ इस विद्यालय के रिक्त पदों पर बहाली करना भर था. नयी कमेटी के द्वारा जैसे ही शिक्षकों की बहाली की गयी कि इस मामले ने तूल पकड़ लिया. इलाके के लोगों ने नयी कमेटी को लेकर कई गंभीर सवाल उठाते हुए फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है.
डीइओ को आरोप पत्र देकर तत्काल इसकी जांच कराने की मांग की गयी है. जांच अगर हुई, तो सब कुछ खुल कर सामने आ जायेगा. कई लोगों की गरदन पर अभी से ही तलवार लटकने लगी है. इलाके के लोगों ने भारतीय संस्कृति के धरोहर के रूप में स्थित स्कूल को बचाने के लिए हर दरवाजा खटखटाना शुरू कर दिया है.
दानकर्ताओं को भी कमेटी में जगह नहीं : स्कूल बनाने के लिए जिन लोगों ने अपने जमीन दान में दी थी, उनके परिजनों को भी नयी कमेटी में जगह नहीं दी गयी है. बता दें कि 1935 में बथना के रहनेवाले राधा किशुन साह ने जमीन को संस्कृत विद्यालय बनाने के लिए दान दिया था, जबकि बथना के व्यवसायी परिवारों ने मिल कर मंदिर के लिए भी जमीन को दान में दिया था.
मंदिर का प्रभाव घटते ही संकट में स्कूल : 1935 में संत वेद वेदांती दास ने बथना के कलवार परिवार से जमीन दान लेने के बाद मंदिर और संस्कृत हाइ स्कूल राधा किशुन साह के नाम पर बनाने के लिए नींव रखी. इलाके के लोगों के सहयोग से काम शुरू हुआ. इस बीच वेदांती जी का निधन हो गया. उनके देहावसान के बाद संत स्वामी जयराम दास ने स्कूल और मंदिर का निर्माण कराया. तब उनके शिष्य रामाशंकर दास विद्यालय में शिक्षक के पद पर कार्यरत थे. जयराम दास के देहावसान के बाद रामाशंकर दास हेडमास्टर बन चुके थे. मंदिर में रह कर पूजा-पाठ और विद्यालय का संचालन भी किया करते थे. इस बीच उनके गुरु भाई नथु दास जलालपुर मठ को छोड़ कर बथना आ गये और रामाशंकर दास जी को नरहवा में शरण लेना पड़ा, जहां उन्होंने एक भव्य मंदिर का निर्माण करा दिया. रामाशंकर दास के संस्कृत स्कूल से हटने के बाद स्कूल संकट में आ गया.
संस्कृत स्कूल बथनाकुटी.
ग्रामीणों ने स्कूल को बचाने के लिए शुरू की मुहिम
कमेटी कर रही जांच
बथना संस्कृत विद्यालय की जांच के लिए कमेटी बनायी गयी है. स्कूल की भौगोलिक स्थिति से लेकर एक-एक बिंदु की गहरायी से जांच करायी जायेगी. अगर गड़बड़ी पायी जाती है, तो प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जायेगी.
अशोक कुमार, डीइओ, गोपालगंज

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >