गोपालगंज : ऋषि भूमि भारत वर्ष की आध्यात्मिक सामाजिक एवं नैतिक परंपरा में नवरात्रि पर्व सृजन करुणा व त्याग से परिपूर्ण भारतीय स्त्रियों की सर्वोच्चता एवं सर्वोत्कृष्टता का परिचायक है. यह बात उचकागांव प्रखंड के अरना बाजार के सरस्वती ज्ञान मंदिर परिसर में एक आयोजन के तहत इलाहाबाद विश्वविद्यालय से डॉ अविनाश कुमार श्रीवास्तव ने कही.
नवरात्रि पर्व, नारी सशक्तीकरण एवं भारत का समग्र विकास चुनौतियां व समाधान विषय पर आयोजित खुली विचार गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में श्री श्रीवास्तव ने कहा कि बदलते वैश्विक संदर्भों में आज किसी भी राष्ट्र के सतत और समग्र विकास में महिलाओं की अहम भूमिका हो गयी है. दिल्ली से आयी स्वाति वरुण सिन्हा ने कहा कि आज विज्ञान, व्यापार, प्रौद्योगिकी व खेलकूद सहित सभी क्षेत्रों में लड़कियां अपनी -अपनी सफलता का परचम लहरा रही हैं.
शैलेश स्मृति न्यास की न्यासधारी व मीडिया सलाहकार महिमा ने कहा कि नवरात्रि पर्व हमें यह एहसास कराता है कि लड़कियां महज उपासना या दया की प्रतीक नहीं हैं. उन्हें मौका मिले तो हर बुराई का सर्वनाथ कर सकती हैं. रजनीश कुमार ‘बड़कू’ ने भी अपने विचार रखे. विचार गोष्ठी का संचालन न्यास के सचिव राजन कुमार तथा धन्यवाद ज्ञापन कुमार वरुण ने किया. इसके पूर्व विचार गोष्ठी में आये अतिथियों ने मां दुर्गा की मूर्ति पर पुष्पांजलि अर्पित की तथा ज्ञान मंदिर के छात्र-छात्राओं ने नव दुर्गा वंदना प्रस्तुत किया. मौके पर डॉ नलिन पांडेय, अभिज्ञा कृष्णा, विनोद यादव, उत्तम कुमार, चंदन कि शोर सिंह, कमलेश सिंह, ललन शाह, मनोज गुप्ता, राम आसरे सहनी व भूलन प्रजापति आदि थे.
