भोज छापर में युवाओं ने शुरू किया घर तक खाना भेजना
सासामुसा : गंडक नदी की त्रासदी झेल रहे पीड़ितों को नौ दिन बाद जब खाना मिला, तो उनकी आंखें झलक गयीं. तपेसरा देवी की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहा था. बच्चे भूख से बिलख रहे थे. जब खाना लेकर उसके पति रघुनाथ पहुंचे, तो उसके आंसू निकल गये.
कल तक दूसरों के लिए सहारा बननेवाले रघुनाथ के सामने अपने बच्चों के लिए आश्रय लेना पड़ रहा है. कुचायकोट प्रखंड के भोजछापर में नीलकंठ संस्थान के बैनर तले भाजपा के युवा नेता दीपक द्विवेदी और सामाजिक कार्यकर्ता मंजीत त्रिपाठी ने मिल कर एक हजार बाढ़पीड़ितों की प्रतिदिन भोजन की व्यवस्था इस कैंप में की है. युवकों के इस साहस ने पीड़ितों पर मरहम लगाने का काम किया है. दीपक द्विवेदी ने बताया कि बड़ी मुश्किल से एक – दो नाव मिली है, जिस पर पीड़ित आ कर खाना खा रहे हैं. उनके परिजनों के लिए खाना को पैक कर भेजा जा रहा है. मंजीत त्रिपाठी ने बताया कि मैंने भूख को नजदीक से देखा है.
