बाढ़ में डूबने से वार्ड सदस्य समेत दो की मौत

जानलेवा बनी गंडक. अपने रिश्तेदार को बांध पर पहुंचा कर लौटने के दौरान हुई घटना गंडक नदी की बाढ़ लोगों पर आफत बन गयी है. डूबने से अब तक तीन की मौत हो चुकी है, जबकि बिजली के करेेंट से काला मटिहनिया के युवक की मौत हो चुकी है. बाढ़ की स्थिति दिनों दिन भयावह […]

जानलेवा बनी गंडक. अपने रिश्तेदार को बांध पर पहुंचा कर लौटने के दौरान हुई घटना

गंडक नदी की बाढ़ लोगों पर आफत बन गयी है. डूबने से अब तक तीन की मौत हो चुकी है, जबकि बिजली के करेेंट से काला मटिहनिया के युवक की मौत हो चुकी है. बाढ़ की स्थिति दिनों दिन भयावह होती जा रही है.
गोपालगंज : गंडक नदी की बाढ़ की त्रासदी झेल रहे गांव की हालत भयावह होती जा रही है. गांव में लोग तिल-तिल कर मरने को विवश हैं. प्रशासन इन तक नहीं पहुंच पा रहा है. गंडक नदी की बाढ़ में डूबने से एक वार्ड सदस्य तथा महिला की अलग-अगल जगहों पर मौत हो गयी है. मौत से दियारे के लोगों में आक्रोश व्याप्त है. बता दें कि वार्ड सदस्य चुन्नी लाल राम अपने रिश्तेदार को बाढ़ से बचाते हुए सिपाया ढाला पर पहुंचा कर लौट रहे थे,
तभी पानी की तेज धारा में आ गये. उनकी डूबने से मौत हो गयी. मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया. बाढ़ के पानी के कारण पुलिस और अधिकारी मौके पर नहीं जा सके. शव को नाव से सिपाया लाया गया, जहां अनुमंडल पदाधिकारी मृत्युंजय कुमार, थानाध्यक्ष गौतम कुमार, सीओ अमित रंजन, बीडीओ दृष्टि पाठक ने पहुंच कर घटना की जानकारी ली. पुलिस ने शव को कब्जे में कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.
उधर, बैकुंठपुर प्रखंड के पकहा गांव में सुग्रीव राय की पत्नी सवरिया कुंवर (60 वर्ष) रविवार की दोपहर चापाकल से पानी लेने गयी. इसी बीच उसके पैर फिसल गये और बाढ़ की तेज धारा में बह गयी. तीन घंटे के प्रयास के बाद ग्रामीणों ने उसका शव बरामद किया. सीओ इंदुभूषण श्रीवास्तव, थानाध्यक्ष मो जाकारिया ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया.
परिजनों पर टूटा दुखों का पहाड़
सासामुसा. कुचायकोट प्रखंड की दुर्ग मटिहनिया पंचायत के वार्ड सदस्य चुन्नी लाल राम की मौत के बाद उसके परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. वार्ड सदस्य की पत्नी माधुरी देवी सूझ-बूझ खो बैठी है. उसके बच्चे राजकुमार (15 वर्ष), कुंती कुमारी (13 वर्ष), बुलेट कुमार (9 वर्ष), शांति कुमारी (7 वर्ष) के सामने चारों तरफ अंधेरा छा गया है. पिता की मौत से इनकी आंखों के आंसू नहीं थम रहे हैं. पिछले नौ दिनों से दाने-दाने के लिए ये लोग मोहताज थे. आज सिर से पिता का छाया उठने के बाद इनका सहारा कौन होगा इसकी चिंता में पूरा परिवार डूबा हुआ है.

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