गोपालगंज : जननी सुरक्षा योजना का लाभ पाने के लिए अब गर्भावस्था के दौरान ही रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा. रजिस्ट्रेशन के बिना गर्भवती महिला को सरकारी अस्पताल में डिलिवरी के बाद भी जेएसवाइ से सहायता राशि नहीं मिलेगी, क्योंकि रजिस्ट्रेशन नंबर व अन्य विवरण का एमसीटीएस से मिलान करके देखा जायेगा. जेएसवाइ में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए शासन ने यह कवायद की है.
अभी तो जेएसवाइ में भुगतान पर पंजीकरण की अनिवार्यता नहीं थी. आशा, प्रसूता को लाती थी और उसी की संस्तुति पर प्रसूता को लाभ मिल जाता था. कई बार घरों में होने वाले प्रसव को सांठगांठ कर अस्पतालों में दर्शाकर सरकारी रकम ऐंठी ली जाती थी. रजिस्ट्रेशन के बाद मिला नंबर टीकाकरण कार्ड पर भी अंकित होगा.
यदि गर्भवती ने ससुराल के निकट के अस्पतालों में रजिस्ट्रेशन कराया हो और प्रसव के ठीक पहले वह अपने मायके चली गयी हो तो भी मायके के निकट के सरकारी अस्पतालों में रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र पर प्रसव कराने पर उसे जेएसवाइ का लाभ मिलेगा. जरूरी यह होगा कि प्रसूता का रजिस्ट्रेशन नंबर व विवरण पोर्टल पर उपलब्घ हो.
यह है योजना
ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं यदि सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराती हैं तो जेएसवाइ के तहत 1400 रुपये व शहरी क्षेत्र की महिलाओं को 1000 रुपये की सहायता मिलती है.
यदि बीपीएल परिवार की किसी महिला की घर पर ट्रेंड स्टाफ से डिलिवरी करायी जाती है तो उसे भी 500 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है.
क्या कहते हैं अधिकारी
पंजीकरण के साथ गर्भवती की कम से कम चार बार जांच अनिवार्य होगी. पंजीकरण न होने की दशा में संस्थागत प्रसव घर भी जेएसवाइ के तहत सहायता नहीं मिलेगी.
डॉ मधेश्वर शर्मा, सीएस, गोपालगंज
