पहल . विशेषज्ञों की टीम ने गंडक नदी के कटाव का किया अध्ययन
गंडक नदी की त्रासदी रोकने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर विशेषज्ञों की टीम ने गंडक के कटाव को रोकने के लिए अध्ययन शुरू किया है. इस अध्ययन से स्थायी निदान निकलने की संभावना दिख रही है.
गोपालगंज : कभी गंडक नदी वरदान थी. आज यह नदी अपने विकराल रूप के कारण आम आदमी के लिए अभिशाप बन गयी है. साल-दर-साल आनेवाली बाढ़ की त्रासदी गंडक नदी के किनारे बसनेवाले गांवों के लिए कहर साबित होती है. नदी की धारा अब तक जिले के 14 गांवों के अस्तित्व को मिटा चुकी है. यह धारा लगातार गोपालगंज शहर की तरफ बढ़ रही है. नदी के कटाव से बांध को भी जबरदस्त खतरा है. इस खतरे को रोकने के लिए विशेषज्ञों की टीम ने बाढ़ संघर्षात्मक बल के अध्यक्ष अब्दुल हामीद के नेतृत्व में अधीक्षण अभियंता लेबल के अधिकारियों के यहां पहुंच कर अध्ययन शुरू किया है.
अध्ययन में सामने आया कि गंडक नदी में पायलट चैनल बना कर नदी की धारा को डायवर्ट किया जा सकता है. नदी की धारा बीच में होने से 145 गांवों को बाढ़ से मुक्ति मिल सकती है. पायलट चैनल के साथ रामपुर टेंगराही स्थित महासेतु से लेकर मसानथाना तक कई जगह तटबंध पर जीयो बैग से एंटी रोजन कार्य की जरूरत बतायी गयी है. हालांकि टीम का मानना है कि 20 मई तक अध्ययन पूरा होगा और एक्शन प्लान के साथ जल संसाधन विभाग को रिपोर्ट सौंप दी जायेगी. इस बार सिहोरवा से सखवाघाट तक 20-25 किमी तक बेल माउस बनाने की योजना पर विचार चल रहा है.
रूढ़की से आये एक्सपर्ट ने दिया था सुझाव : रूढ़की आइआइटी कॉलेज के विशेषज्ञ व प्रो नयन शर्मा ने गंडक नदी पर बनाये जा रहे महासेतु को लेकर मौके पर स्थिति का आकलन करने के बाद एक सुझाव पुल निर्माण निगम को दिया था.
उनके सुझाव को किस हद तक पुल निर्माण निगम ने पूरा किया इसकी जानकारी जुटाने में टीम लगी हुई है. नयन शर्मा के सुझावों पर अमल हो तो संभवत: कटाव से निजात पायी जा सकती थी.
सदर विधायक ने भी दिया था सुझाव : बाढ़ विशेषज्ञों की टीम के समक्ष विधायक सुबास सिंह ने सुझाव दिया है कि पतहरा से खाप मकसुदपुर तक सात-आठ स्लोपिंग बेडवार बनाया जाये. साथ ही कटाव रोकने के लिए स्थायी रूप से बोल्डर पिचिंग करायी जाये, ताकि तटबंध को मजबूत किया जा सके. इतना ही नहीं विशेषज्ञों की टीम ने आसपास मौजूद रहनेवाले लोगों से भी कई सलाह ली है. सभी सुझाव और सलाह पर अध्ययन किया जा रहा है.
आठ करोड़ का हुआ था घोटाला
गंडक नदी में पायलट चैनल बनाने के लिए वर्ष 2011 में जल संसाधन विभाग ने राशि का आवंटन किया था. पायलट चैनल बनाने के लिए हैदराबाद की धरती ड्रेनेज कंपनी को काम दिया गया. बिना पायलट चैनल बनाये ही आठ करोड़ रुपये की राशि का घोटाला कर लिया गया था. इस मामले में आठ अभियंताओं को निलंबित कर दिया गया था.
क्या कहते हैं अध्यक्ष
सीएम के निर्देश पर गंडक नदी की बाढ़ से बचाव के लिए यह टीम का गठन किया गया है. हर पहलू पर टीम काम कर रही है. किसी तरह से नदी के कोप से बचा जाये इसका अध्ययन कर रिपोर्ट देने के बाद इस पर कार्य शुरू होगा.
अब्दुल हामीद, अध्यक्ष, अध्ययन दल
