किसानों के नाम फर्जी वाउचर बना कर ~2.32 करोड़ की निकासी

मंत्री के आदेश पर गन्ना आयुक्त ने बैंक खाते को किया सीज सहायक निदेशक कार्यालय का जब्त किया गया महत्वपूर्ण रेकाॅर्ड किसानों के खेतों में जाकर मंत्री ने की पड़ताल गोपालगंज : मुख्यमंत्री गन्ना विकास योजना के अनुदान में व्यापक धांधली सामने आयी है. धांधली सामने आते ही गन्ना उद्योग विभाग के मंत्री एवं अधिकारी […]

मंत्री के आदेश पर गन्ना आयुक्त ने बैंक खाते को किया सीज

सहायक निदेशक कार्यालय का जब्त किया गया महत्वपूर्ण रेकाॅर्ड
किसानों के खेतों में जाकर मंत्री ने की पड़ताल
गोपालगंज : मुख्यमंत्री गन्ना विकास योजना के अनुदान में व्यापक धांधली सामने आयी है. धांधली सामने आते ही गन्ना उद्योग विभाग के मंत्री एवं अधिकारी हैरत में पड़ गये हैं. 2016-17 के लिए किसानों को दिये जानेवाले उत्तम किस्म के बीज के अनुदान में फर्जी किसानों के नामों की सूची बना कर ट्रेजरी से 2.32 करोड़ रुपये की निकासी कर ली गयी है. 15 लाख की राशि बीज विक्रेता के नाम पर ट्रांसफर भी कर दी गयी है. जब इसका खुलासा हुआ,
तो आनन-फानन में मंत्री खुर्शीद उर्फ फिरोज आलम के आदेश पर गन्ना आयुक्त ग्रिजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव ने तत्काल प्रभाव से बैंक के एकाउंट को सीज कर दिया. गनीमत है कि बैंक के खाते में 2.17 करोड़ की राशि अभी पड़ी हुई थी.
पूर्व जदयू विधायक मंजीत सिंह की शिकायत पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 28 दिसंबर, 2012 को बैठक कर इस पूरे प्रकरण में जांच करने का निर्णय लिया था. मुख्यमंत्री के निर्णय के बाद गन्ना उद्योग विभाग के मंत्री खुर्शीद उर्फ फिरोज आलम ने ईखायुक्त ग्रिजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव, संयुक्त
किसानों के नाम फर्जी…
ईखायुक्त एसएन लाल, पूर्व विधायक मंजीत सिंह के साथ छह मई से आठ मई के बीच गोपालगंज जिले के एकडेरवा, भितभेरवा, तिरविरवा, गवंदरी, धतिंगना आदि गांवों में जाकर किसानों के बीच चौपाल लगाया. किसानों के खेत में जाकर गन्ने की स्थिति की जानकारी ली गयी. इसमें सामने आया कि सहायक गन्ना निदेशक गोपालगंज द्वारा उपलब्ध करायी गयी किसानों की सूची के अनुरूप किसानों के खेत में गन्ना नहीं था.
कई किसानों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने न तो गन्ना बोया है और न ही किसी तरह के अनुदान के लिए आवेदन दिया है. किसानों के बयान को दर्ज करते हुए सरकार ने कार्रवाई का निर्णय लिया है. पूरे बिहार में इस तरह की धांधली की आशंका को देखते हुए गहन जांच का फैसला किया गया है.
फर्जीवाड़े में ये हैं शामिल
सहायक निदेशक के कार्यालय के रेकाॅर्ड की जांच में पाया गया है कि किसानों से बिना आवेदन लिये मार्च में एक सूची तैयार कर सूची के आधार पर रोकड़पाल कुंदन कुमार से जबरन बिल बनवाया तथा ट्रेजरी से राशि निकाल ली गयी. सहायक निदेशक रवींद्र कुमार का विपत्र पर हस्ताक्षर है, लेकिन आवेदन अब लिया जा रहा है, जबकि सहायक निदेशक को एक – एक आवेदन का सत्यापन करने के बाद बिल पास करना था. ऐसा घोटाला करने की मंशा से किया गया है. प्रथमदृष्टया मंत्री ने इसे फर्जीवाड़ा मानते हुए सहायक ईख आयुक्त रवींद्र कुमार तथा संयुक्त निदेशक मुख्यालय शंभु प्रसाद सिंह एवं स्थानीय कर्मियों को दोषी पाया है, जिनके विरुद्ध नियमानुकूल कार्रवाई का निर्देश मंत्री ने दिया है.
क्या है मुख्यमंत्री गन्ना विकास योजना का अनुदान
योजना के तहत किसान अगर उन्नत किस्म का बीज खरीदता है, तो सामान्य जाति के किसानों के लिए 135 रुपये, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के किसानों के लिए 175 रुपये प्रति क्विंटल का अनुदान था, जबकि उन्नत किस्म के बीज तैयार करनेवाले को अलग से 55 रुपये का प्रोत्साहन अनुदान देना था. इसके अलावा आधार पौधशाला तैयार करनेवाले किसान को 25 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान देना था.
किसानों के लिए आवंटित अनुदान की राशि – 3.77 करोड़
विभाग ने अनुदान की राशि को लौटाया – 1.45 करोड़
बैंक खाते में पाया गया – 2.17 करोड़
बैंक से बीज विक्रेता के खाता में ट्रांसफर हुआ – 15 लाख

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