कड़ी मेहनत के बल पर बेटे को बनाया आइआइटीएन

कड़ी मेहनत के बल पर बेटे को बनाया आइआइटीएन गरीबी ने झुकाया, पर नहीं हारी हिम्मत, गरीबी पर भारी पड़ा एक पिता का सपनासंडे संडे खासफोटो न. 13योगेंद्र कश्यप, कटेया ‘जीने का सलीका कोई मुझसे सीखे, मुश्किलों में भी रहना तो लड़ते रहना ‘ इन पंक्तियों से प्रेरणा लेकर एक पिता ने गरीबी और मुश्किलों […]

कड़ी मेहनत के बल पर बेटे को बनाया आइआइटीएन गरीबी ने झुकाया, पर नहीं हारी हिम्मत, गरीबी पर भारी पड़ा एक पिता का सपनासंडे संडे खासफोटो न. 13योगेंद्र कश्यप, कटेया ‘जीने का सलीका कोई मुझसे सीखे, मुश्किलों में भी रहना तो लड़ते रहना ‘ इन पंक्तियों से प्रेरणा लेकर एक पिता ने गरीबी और मुश्किलों से लड़ते हुए वह मुकाम पा लिया, जिसके लिए बड़े-बड़े लोग तरसते हैं. राह में मुश्किलें तमाम आयीं, लेकिन इस पिता ने हिम्मत नहीं हारी. आंखों में सपने थे, जिसे तोड़ भी नहीं सकता था, लेकिन सपनों को साकार करने के लिए एक ऐसे रास्ते से गुजरना था, जिस पर सिर्फ कांटे-ही-कांटे थे. पिता ने हिम्मत नहीं हारी, तो पुत्र ने पिता के सपने को साकार करने के लिए अपनी जान लगा दी. यह कहानी है गोपालगंज जिले के पश्चिमी छोर पर स्थित कटेया नगर पंचायत के रहनेवाले उस रविंद्र की, जिसने तंगहाली में जीते हुए भी अपने सपने को कदम-दर-कदम चल बुलंदी तक पहुंचा दिया. – इंटर तक पढ़े पिता ने देखे कई सपने रविंद्र ने इंटर तक की पढ़ाई की है. उसके सपने भी थे. लेकिन, हालात ऐसे बन चुके थे कि आगे की पढ़ाई नहीं कर सका. असमय परिवार की जिम्मेवारी एवं तंगहाली ने उसकी पढ़ाई तो रोक दी, लेकिन उसके मन में पल रहे सपनों ने अपना घर नहीं छोड़ा. उन्होंने एक छोटी-सी दुकान खोल ली. दुकान की आय से मुश्किल से परिवार का गुजारा होने लगा. इस बीच तीन बच्चे हुए. बड़ा बेटा सोनू जब स्कूल जाने लगा, तो उसकी मेधा की चर्चा होने लगी. चर्चाओं को सुन रवींद्र के मन के कोने में दबे सपने उबाल मारने लगे. – समस्याओं के बाद भी नहीं मानी हारसोनू जब बड़ा होने लगा, तो उसकी पढ़ाई का खर्च भी बढ़ने लगा. इसी बीच उसके गुरुजनों ने सोनू के पिता से नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा दिलाने की बात कही. पहले ही प्रयास में सोनू का चयन हो गया. सोनू ने नवोदय विद्यालय से 2012 में हाइस्कूल की परीक्षा काफी अच्छे अंकों से पास की. इसके बाद सोनू के मित्र नवोदय छोड़ कर कोटा तैयारी के लिए चले गये. सोनू के पिता ने जब उससे आगे की पढ़ाई के बारे में पूछा, तो उसने आर्थिक स्थिति काे देखते हुए नवोदय से ही इंटर की पढ़ाई करने का निर्णय लिया. नवोदय विद्यालय द्वारा उसे हैदराबाद इकाई में पढ़ाई करने भेज दिया गया. – पहले ही प्रयास में बना आइआइटीएन रवींद्र ने अपने बेटे से कोटा जाकर कोचिंग करने की बात कही. प्रवेश परीक्षा में सोनू ने अच्छे अंक लेकर स्कॉलरशिप प्राप्त कर की. इससे पिता का हौसला बढ़ा. अपने सपने को साकार होते देख पिता की हिम्मत बढ़ी और उसने कड़ी मेहनत की बदौलत बेटे को आइआइटी की परीक्षा में शामिल कराया. प्रथम प्रयास में ही आइआइटी की परीक्षा में सफलता मिल गयी. पिता कहते हैं कि सपना जरूर देखना चाहिए क्योंकि सपने साकार भी होते हैं.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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