गोपालगंज : आप भी थोड़े देर के लिए चौक जायेंगे. लेकिन, बात सच है. भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) ने जिन बेटियों को गोद लेकर पढ़ाने की जिम्मेवारी उठायी. प्रशासन और समाज से गरीब बेटियों को पढ़ाने का श्रेय ले लिया गया. जब पढ़ाई का खर्च देने की बात आयी, तो बैंक ने चुप्पी साध ली. आज एसबीआइ की गोद में पढ़ने के लिए बेटियां तड़प रही हैं.
थावे की रहनेवाली सरीता कुमारी पैसे के अभाव में पढ़ाई छोड़ने पर विवश है. इसी तरह प्रियंका कुमारी, रानी, शिवानी, मलिका आदि भी आर्थिक संकट से जूझ रही हैं. रानी, शिवानी तथा प्रियंका कुमारी ने बताया कि 11 नवंबर, 2008 को भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा ने पांच निर्धन बेटियों को गोद लेकर पढ़ाने की जिम्मेवारी ली थी. तत्कालीन शाखा प्रबंधक बीपी सिंह ने उनकी पढ़ाई के लिए चेक प्रदान किया.
उस कार्यक्रम में तत्कालीन डीडीसी सुधीर श्रीवास्तव, बैंक अधिकारी सतीश पांडेय, उमेश झा आदि मौजूद थे. उसके बाद उन बेटियों को पढ़ाने के लिए एक बार और चेक दिया गया, लेकिन प्रतिवर्ष इनका अंक प्रमाणपत्र जमा करा लिया गया, जबकि छात्राएं अपनी पढ़ाई के लिए पैसा मांगने जाती हैं, तो उन्हें टाल दिया जाता है. वहीं दूसरी तरफ शाखा प्रबंधक से संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि ऐसी जानकारी नहीं है. अगर उन्हें गोद लिया गया है, तो बैंक के नियमानुसार उन्हें पैसा दिया जायेगा.
