गोपालगंज : ठेकेदार रामाशंकर सिंह की जलाकर हत्या करने के मामले में जल संसाधन विभाग के फरार तीनों अभियंता कोर्ट से जमानत लेने के फिराक में हैं. पुलिस को इसकी भनक मिल चुकी है. अभियंताओं की ओर से केस से जुड़ें कागजातों के नकल निकाले गये हैं. हालांकि, जमानत के लिए अबतक किसी कोर्ट में अर्जी नहीं दी गयी है.
पुलिस फरार अभियंताओं की गतिविधियों पर नजर रख रही है. पिछले 15 दिनों से अंधेरे में तीर चला रहे पुलिस अधिकारियों का मानना है कि फरार अभियंताओं को जमानत नहीं मिलेगी. अभियंताओं की जमानत अर्जी को खारिज कराने के लिए पुलिस हर स्तर से तत्पर है. जांच रिपोर्ट के आधार पर केस से जुड़े आइपीसी की धारा में भी बदलाव किया जा सकता है.
पुलिस के आलाधिकारी फिलहाल इस मामले में खुलकर कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं. डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने परिजनों से मिलने के बाद 48 घंटे का वक्त दिया था, लेकिन अबतक उनके आश्वासन को पूरा नहीं किया जा सका. ठेकेदार की हत्या में फरार जल संसाधन विभाग के अभियंताओं की पहुंच हाइलेवल पर होने की बात बतायी जा रही है.
विभाग के सूत्रों की मानें तो मुख्य अभियंता की सेटिंग उच्च अधिकारियों तक थी, जिससे रिश्वत मांगने में उन्हें कोई डर नहीं था. जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता जितेंद्र सिंह, मुख्य अभियंता मुरलीधर सिंह, कार्यपालक अभियंता सत्येंद्र कुमार और मुख्य अभियंता की पत्नी कामिनी सिंह की तलाश पुलिस को है.
अभियंताओं के साथ चार अन्य अज्ञात अभियुक्त भी शामिल हैं, जो फरार हैं. रिश्वत लेने का वीडियो वायरल होने के बाद जल संसाधन विभाग के एसडीओ और दोनों जेइ के विरुद्ध अबतक कोई कार्रवाई विभागीय स्तर पर नहीं की गयी. डीएम ने वीडियो की जांच करने का आदेश दिया था. उधर, विभाग के सूत्रों का कहना है कि एसडीओ और दोनों जेइ अपने क्षेत्र में काम कर रहे हैं. वायरल वीडियो में एसडीओ और दोनों जेइ का नाम रिश्वत लेने में आया था.
परिवार क्या कदम उठायेगा, आज होगा फैसला
मृतक ठेकेदार रामाशंकर सिंह का श्राद्धकर्म बीत चुका है. फरार अभियंताओं की गिरफ्तारी नहीं होने पर पीड़ित परिवार आगे क्या कदम उठायेगा, इसका फैसला शुक्रवार होगा. मृतक ठेकेदार के परिजनों को नवनिर्मित आवास का पेमेंट भी नहीं मिल सका है, जिसके कारण ठेकेदार की हत्या हुई. विभाग की ओर से अभियंताओं के विरुद्ध बर्खास्तगी की कार्रवाई भी नहीं की गयी. इन तमाम बिंदुओं पर कार्रवाई नहीं होने से पीड़ित परिवार में नाराजगी है.
