रोजेदारों को भा रहीं देसी टोपियां, बढ़ी डिमांड

गोपालगंज : माह-ए-रमजान की रौनक बाजार में देखने को मिल रही है. रोजेदारों के सिर पर सजी तरह-तरह की टोपियां आकर्षित करती हैं. रंग-बिरंगी देसी व विदेशी टोपियां नया रंग भरने का काम कर रही हैं. रमजान में इस बार लोगों के सिर पर विदेशी की बजाय देशी टोपियां भी खूब सज रही है. सूती […]

गोपालगंज : माह-ए-रमजान की रौनक बाजार में देखने को मिल रही है. रोजेदारों के सिर पर सजी तरह-तरह की टोपियां आकर्षित करती हैं. रंग-बिरंगी देसी व विदेशी टोपियां नया रंग भरने का काम कर रही हैं. रमजान में इस बार लोगों के सिर पर विदेशी की बजाय देशी टोपियां भी खूब सज रही है.

सूती टोपियों को रोजेदार खास तवज्जो दे रहे हैं. यह टोपी अन्य के मुकाबले महंगी हैं और उनकी बनावट भी अलग है.
सूती टोपियों की मांग : पुराने समय में नमाजियों के सिर पर लखनवी, रामपुरी व हैदराबाद स्टाइल की निजामी टोपियां देखने को मिलती थीं, लेकिन अब मार्केट में देसी व विदेशी टोपियों की भरमार है.
इस बार चलन में देसी टोपियां ज्यादा हैं. बाजार में अलिफ, अल-फदीला, सना, सीरिया, जन्नत, बेंत टोपी, समरदाना, मोती, पाकीजा, जीनत, सुन्नत, तुर्की, स्टार, लावर फोम, इंडोनेशिया, बांग्लादेश व चीन में बनीं टोपियां मिल रही हैं. यह पहला मौका है जब रोजेदारों की पहली पसंद देश में ही बनी रेशमी, सूती व प्लास्टिक की टोपियां हैं.
सुन्नत-ए-रसूल व इस्लाम की पहचान हैं टोपियां : मेन रोड के पास टोपी बेचने वाले अब्दुल मनान व सब्जी मंडी मार्केट में दुकानदार गुड्डू भाई बताते हैं कि इस्लाम में टोपी पहनना सुन्नत-ए-रसूल और इस्लाम की पहचान है. मार्केट में 20 रुपये से 200 रुपये कीमत तक की टोपियां हैं. गर्मी को ध्यान में रखते हुए हर उम्र के लोगों के लिए महीन व जालीदार टोपियां भी बाजार में उपलब्ध हैं.

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