गोपालगंज : मुजफ्फरपुर के अल्पावास गृह में हुए सेक्स स्कैंडल के भंडाफोड़ के बाद आनन-फानन में गोपालगंज अल्पावास गृह से फरार दो युवतियों के मामले में नौ माह बाद दर्ज करायी गयी प्राथमिकी को लेकर कोर्ट गंभीर हो गया है. सीजेएम विश्व विभूति गुप्ता की कोर्ट ने पूछा है कि आखिर नौ माह बाद प्राथमिकी क्यों दर्ज हुई.
डीजीपी व गृह सचिव को पत्र लिखकर रिपोर्ट मांगा गया है कि किस स्तर पर समुचित कार्रवाई करने में लापरवाही हुई है. कोर्ट के गंभीर रुख से संलिप्त अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती है. कोर्ट इस मामले की मॉनीटरिंग भी शुरू कर दी है. अल्पावास केंद्र की पुनर्वास पदाधिकारी सुनिती कुमारी ने नगर थाने में गत मंगलवार की देर शाम प्राथमिकी दर्ज करायी है. पुनर्वास पदाधिकारी के अनुसार दोनों लड़कियां पांच अक्तूबर 2017 की रात में फरार हुई थीं. छह अक्तूबर को मामले की सूचना नगर थाने में दी गयी थी. लेकिन, पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर फरार लड़कियों को ढूंढ़ना उचित नहीं समझा. अबतक उन दोनों लड़कियों का कोई सुराग नहीं मिल सका है. परिजनों से संपर्क करने की कोशिश भी पुलिस और अल्पावास केंद्र के अधिकारियों ने नहीं की. मुजफ्फरपुर में हुई घटना के बाद अल्पावास केंद्र के अधिकारियों की नींद खुली, जिसके बाद गायब लड़कियों के मामले में प्राथमिकी दर्ज करायी.
पुलिस की टीम युवतियों की तलाश में जुटी : जिला अल्पावास गृह से फरार दोनों लड़कियों की तलाश के लिए पुलिस टीम का गठन किया गया है. नगर थानाध्यक्ष रवि कुमार की माने तो पुलिस की टीम युवतियों की तलाश में बरौली और कटेया के कई गांवों में छापेमारी की है. गायब लड़कियों में कटेया के खदही गांव की दूजा कुमारी व भोरे गांव की अनुराधा कुमारी शामिल हैं. इन दोनों लड़कियों के पता का सत्यापन किया जा रहा है. युवतियों के परिजनों से अब तक पुलिस को संपर्क नहीं हो पाया है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.
एनजीओ पर की जायेगी कार्रवाई : डीएम
गोपालगंज. राजवाही कॉलोनी में स्थित महिला अल्पावास गृह से दो लड़कियों के फरार होने के मामले में प्रशासनिक स्तर पर जांच और एनजीओ पर कार्रवाई शुरू हो गयी है. डीएम अनिमेष कुमार पराशर ने बताया कि पूरे मामले की जांच करायी जा रही है. डीएम ने कहा कि अल्पावास गृह चलाने वाली एनजीओ के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जायेगी.
अल्पावास गृह में प्रशासनिक चूक
अल्पावास गृह से युवतियों के फरार होने के मामले में प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर चूक हुई है. भले ही इस मामले में लीपापोती कर दी गयी, लेकिन मामला काफी संगीन है. अल्पावास गृह में सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा था. इसलिए लड़कियों के फरार होने के मामले में कोई सुराग नहीं मिला. लड़कियां फरार हुई या केंद्र से गायब करायी गयी, इसका खुलासा नहीं हो सका है. पुलिस ने जांच करने के बाद मामले में खुलासा करने की बात कही है. गोपालगंज अल्पावास गृह में भी बड़े स्कैंडल के संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है. कोर्ट के गंभीर होने के बाद इसमें लिप्त लोगों की हाथ-पांव फूलने लगे हैं.
