Bihar News: गोपालगंज शहर के हजियापुर कैथवलिया गांव में स्थित करीब 100 साल पुराने राम जानकी मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य शुरू हो गया है. समय के साथ मंदिर भवन काफी जर्जर हो गया था, जिसके बाद ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने मिलकर पुराने ढांचे को हटाकर नए और भव्य मंदिर के निर्माण का फैसला लिया. गांव के लोगों और श्रद्धालुओं के सहयोग से अब मंदिर निर्माण का काम शुरू कर दिया गया है. निर्माण को लेकर पूरे गांव में उत्साह का माहौल है.
राजस्थान के सैंड स्टोन से बनेगा मंदिर
श्रीराम जानकी जनकल्याण ट्रस्ट के सदस्यों के अनुसार मंदिर का निर्माण राजस्थान के प्रसिद्ध सैंड स्टोन (बलुआ पत्थर) से किया जाएगा. यह पत्थर मजबूती, सुंदर नक्काशी और लंबे समय तक टिकाऊ रहने के लिए जाना जाता है. खास बात यह है कि इसी तरह के पत्थरों का उपयोग अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण में भी किया गया है. मंदिर को पारंपरिक भारतीय स्थापत्य शैली में तैयार किया जाएगा.
1.75 करोड़ रुपये होगी निर्माण लागत
निर्माण समिति के अनुसार मंदिर निर्माण पर करीब 1 करोड़ 75 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है. इसके लिए गांव के लोगों के साथ-साथ बाहर रहने वाले ग्रामीणों और श्रद्धालुओं से भी सहयोग लिया जा रहा है. समिति का लक्ष्य मंदिर को शहर के सबसे भव्य राम जानकी मंदिरों में शामिल करना है.
राजस्थान से आएंगे कारीगर
मंदिर को आकर्षक स्वरूप देने के लिए राजस्थान से अनुभवी कारीगर बुलाए जाएंगे. ये कारीगर मंदिर के स्तंभों, दीवारों और शिखर पर सुंदर नक्काशी और कलाकृतियां तैयार करेंगे. समिति का कहना है कि मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि गांव की आस्था और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक भी है.
वर्षों से आस्था का केंद्र रहा है मंदिर
गांव के लोगों के लिए राम जानकी मंदिर विशेष महत्व रखता है. यहां हर साल रामनवमी, दीपावली और कई अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं. ग्रामीणों का मानना है कि नए मंदिर के निर्माण से धार्मिक गतिविधियों को और बढ़ावा मिलेगा तथा श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी.
मंदिर परिसर में लगेगा भव्य घंटा
निर्माण पूरा होने के बाद मंदिर परिसर में एक बड़ा और भव्य घंटा लगाया जाएगा. मंदिर समिति का कहना है कि भगवान को भोग लगाए जाने और आरती के समय घंटा बजाया जाएगा, जिससे पूरे गांव को इसकी जानकारी मिल सके.
हर दिन होगी भव्य आरती और पूजा
नए मंदिर में प्रतिदिन नियमित पूजा-पाठ और भव्य आरती का आयोजन किया जाएगा. मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बैठने, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों के लिए भी विशेष व्यवस्था की जाएगी.
पुरानी परंपरा को फिर से जीवित करने की तैयारी
गांव के युवाओं का कहना है कि करीब 20 साल पहले तक गांव में एक परंपरा थी. भगवान को भोग लगाए जाने के बाद ही गांव के लोग अपने घरों में भोजन करते थे. अब मंदिर के पुनर्निर्माण के साथ इस धार्मिक परंपरा को फिर से जीवित करने की चर्चा भी शुरू हो गई है.
वरिष्ठ नागरिकों के लिए लगेगा मेडिकल कैंप
मंदिर समिति केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहना चाहती. समिति ने मंदिर परिसर में हर सप्ताह मेडिकल कैंप लगाने की योजना भी बनाई है. इन शिविरों में लोगों की स्वास्थ्य जांच की जाएगी और विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को चिकित्सा संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.
धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र बनेगा मंदिर
ग्रामीणों को उम्मीद है कि मंदिर बनने के बाद यह केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र का धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र बन जाएगा. साथ ही आसपास के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी यह आकर्षण का प्रमुख केंद्र होगा. मंदिर निर्माण शुरू होने के साथ ही हजियापुर कैथवलिया गांव में उत्साह और आस्था का माहौल देखने को मिल रहा है.
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