World Breastfeeding Week 2026 : गया जी में एक से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाएगा. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा शिशु के जन्म से छह माह तक सिर्फ स्तनपान कराने तथा छह माह के बाद अनुपूरक आहार प्रारंभ करने और दो वर्ष तक नियमित स्तनपान कराने संबंधी बातों पर लोगों में जागरूकता लाने का काम किया जाएगा.
इस वर्ष विश्व स्तनपान सप्ताह का थीम “जीवन की स्थायी शुरुआत के लिए स्तनपान : कारगर व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है” रखा गया है. सिविल सर्जन डॉ. राजाराम प्रसाद ने कहा कि बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए स्तनपान की भूमिका महत्वपूर्ण है.
शिशु के लिए भोजन और दवा के रूप में दूध
मां का दूध जहां शिशु के लिए भोजन के रूप में समझा जाता है, वहीं यह शिशु के लिए दवा का भी काम करता है. मां के दूध में वे सभी तत्व पाए जाते हैं, जिससे बच्चे विभिन्न प्रकार के रोग जैसे डायरिया, निमोनिया और कुपोषण जैसी जानलेवा बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं.
मृत्यु दर में कमी और स्तनपान के लाभ
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, जन्म के एक घंटे के भीतर नवजात को स्तनपान शुरू कराने से शिशु मृत्यु दर में 20 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है.
छह माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने से दस्त और निमोनिया के खतरे में क्रमशः 11 प्रतिशत और 15 प्रतिशत कमी लाई जा सकती है. अगर बच्चे को जन्म के 24 घंटे तक भी मां का दूध नहीं मिलता है, तो मौत का खतरा दोगुना हो जाता है.
तत्काल में आई रिपोर्ट के मुताबिक, जो मां स्तनपान कराती हैं, उनमें स्तन कैंसर का खतरा भी कम होता है.
आशा एवं एएनएम द्वारा घर-घर जागरूकता अभियान
डीपीएम नीलेश कुमार ने बताया कि आशा एवं एएनएम घर-घर जाकर माताओं को स्तनपान के लिए जागरूक करेंगे.
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