शेरघाटी प्रखंड के उचिरवां गांव स्थित जगतगुरु स्वामी धरनीधराचार्य वैदिक गुरुकुलम पिछले 45 वर्षों से अधिक समय से वैदिक परंपरा और संस्कृत शिक्षा को आगे बढ़ाने में जुटा है. गुरुकुल में अध्ययनरत बच्चों को निःशुल्क शिक्षा के साथ आवास और भोजन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है. संस्कृत और वैदिक शिक्षा के साथ बच्चों को आधुनिक शिक्षा भी दी जाती है.
60 बच्चों को छह शिक्षक दे रहे शिक्षा
गुरुकुल में वर्तमान में करीब 60 बच्चे अध्ययनरत हैं. इन बच्चों को छह शिक्षक शिक्षा प्रदान कर रहे हैं. इनमें केशव शर्मा व्याकरणाचार्य, गोविंदाचार्य, अविनाश कुमार सिन्हा, राहुल कुमार, जगन्नाथ कुमार और मनोज कुमार शामिल हैं. शिक्षक बच्चों को वैदिक परंपरा, संस्कृत भाषा और सनातन संस्कृति से जोड़ने के उद्देश्य से शिक्षा दे रहे हैं.
कई जिलों से गुरुकुल पहुंच रहे बच्चे
गुरुकुल का संचालन स्थानीय समाज के सहयोग से वैदिक परंपराओं के अनुरूप किया जा रहा है. गुरुकुल के शिक्षकों के अनुसार, यहां बिहार के गया, पटना, मुंगेर, औरंगाबाद, छपरा और सारण समेत विभिन्न जिलों से बच्चे शिक्षा प्राप्त करने पहुंचते हैं. इसके अलावा झारखंड के रांची और हजारीबाग से भी बच्चे यहां आकर अध्ययन कर रहे हैं.
धोती-कुर्ता में संस्कृत का शुद्ध उच्चारण
गुरुकुल परिसर में छोटे-छोटे बच्चे धोती-कुर्ता पहनकर संस्कृत का शुद्ध उच्चारण करते हुए अध्ययन करते नजर आते हैं. वैदिक मंत्रों और संस्कृत के वातावरण के बीच बच्चों का रहन-सहन भी पारंपरिक नजर आता है. शिक्षकों का कहना है कि गुरुकुल बच्चों को शिक्षा के साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी प्रदान कर रहा है.
समाज के सहयोग से आगे बढ़ रही परंपरा
गुरुकुल के संचालन में समाज की ओर से मिलने वाले सहयोग को शिक्षक महत्वपूर्ण मानते हैं. शिक्षकों ने आगे भी समाज से सहयोग की अपेक्षा जताई है, ताकि वैदिक शिक्षा और संस्कृत संस्कृति की यह परंपरा निरंतर जारी रह सके. गुरुकुल में शिक्षा के साथ संस्कार और परंपरा को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है.
