Gaya Ji Maoist Murder Case Verdict : गया जी जिले के शेरघाटी अंतर्गत डुमरिया थाना क्षेत्र में 2014 में हुए बहुचर्चित हत्याकांड में कोर्ट ने फैसला सुनाया है. एडीजे-4 जावेद अहमद की अदालत ने पुलिस मुखबिरी के आरोप में हुई हत्या के मामले में तीन आरोपितों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है.
साक्ष्य के अभाव में बरी हुए तीनों आरोपित
बचाव पक्ष के अधिवक्ता अजय कुमार श्रीवास्तव ने कोर्ट के इस फैसले की विस्तृत जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों और गवाहों का गहन परीक्षण किया. पर्याप्त सबूत नहीं मिलने पर संदेह का लाभ देते हुए तीनों आरोपितों को दोषमुक्त करार दे दिया गया.
2014 में पुलिस मुखबिरी के आरोप में हुई थी हत्या
यह पूरा मामला डुमरिया थाना कांड संख्या 111/14 से पूरी तरह संबंधित है. प्राथमिकी के अनुसार 6 दिसंबर 2014 की रात करीब 10 माओवादियों ने छकरबंधा निवासी साबिर मियां का उनके घर से अपहरण कर लिया था. माओवादियों ने साबिर मियां पर पुलिस का मुखबिर होने का गंभीर आरोप लगाया था.
पहाड़ पर ले जाकर मारी गई थी गोली
अपहरण के बाद माओवादी पीड़ित साबिर मियां को पास के एक पहाड़ पर ले गए थे. वहां ले जाकर माओवादियों ने उनकी निर्मम तरीके से गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस खौफनाक घटना के बाद मृतक की पत्नी सबीना खातून के बयान पर अज्ञात माओवादियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी.
पुलिस अनुसंधान में हुई थी तीन गिरफ्तारियां
पुलिस ने अपनी जांच के दौरान दरोगी सिंह, लक्ष्मी सिंह तारचुंआ और औरंगाबाद जिले के विशनपुर निवासी दारा यादव को आरोपित बनाया था. गिरफ्तारी के बाद ये तीनों आरोपित लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में रहे. इस दौरान न्यायालय में इस हत्याकांड का लंबा ट्रायल चलता रहा.
लोक अभियोजक और बचाव पक्ष में हुई लंबी बहस
न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक देवपूजन कुमार ने कड़ी बहस की. वहीं बचाव पक्ष का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता अजय कुमार श्रीवास्तव ने पूरी मजबूती के साथ किया. अंततः अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर अपना फैसला सुना दिया.
कोर्ट का अंतिम फैसला और वर्तमान स्थिति
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद एडीजे-4 की अदालत ने तीनों आरोपितों को बरी करने का स्पष्ट आदेश जारी कर दिया है. बचाव पक्ष के अनुसार ठोस सबूतों की कमी के कारण यह फैसला आरोपितों के पक्ष में गया. अब सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद बरी किए गए लोगों को जेल से रिहा कर दिया जाएगा.
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