Gaya Ji News: गया कॉलेज शिक्षक संघ की ओर से बुधवार को एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न शैक्षणिक विभागों के प्राध्यापकों ने भाग लिया. बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु गवर्नर (कुलाधिपति) सचिवालय द्वारा जारी किए गए 'जनरल कंडीशन स्टेच्यूट' के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा करना था. संघ के सदस्यों ने कहा कि यद्यपि स्टेच्यूट में शामिल कई बिंदु उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए स्वागत योग्य हैं, लेकिन सेवा अनुबंध, स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट और सेवा शर्तों से जुड़े कई प्रमुख प्रावधानों पर तत्काल पुनर्विचार और संशोधन की आवश्यकता है.
स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट और सेवा पुष्टि के स्पष्ट मानक तय करने की मांग
शिक्षकों ने विशेष रूप से प्रोबेशन अवधि और स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट से जुड़े नियमों पर गहरी चिंता व्यक्त की. स्टेच्यूट के तहत प्रोबेशन अवधि समाप्त होने से तीन माह पूर्व शिक्षकों को अपनी स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट जमा करनी होगी और रिपोर्ट संतोषजनक नहीं पाए जाने पर सेवा समाप्ति तक का प्रावधान रखा गया है. शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि उन्हें मूल्यांकन की व्यवस्था से कोई विरोध नहीं है, परंतु सेवा पुष्टि (कन्फर्मेशन) और प्रोबेशन के दौरान मूल्यांकन किन तय पैमानों और मानकों पर किया जाएगा, इसे पूरी तरह स्पष्ट किया जाना चाहिए. अस्पष्ट प्रावधान होने की स्थिति में भविष्य में सेवा पुष्टि और प्रोन्नति (प्रमोशन) के नाम पर अधिकारियों द्वारा शिक्षकों को अनावश्यक रूप से परेशान किए जाने की पूरी आशंका बनी रहेगी.
डीएचई पद और रिपोर्टिंग व्यवस्था पर शिक्षकों ने उठाए सवाल
बैठक में नए स्टेच्यूट के तहत उच्च शिक्षा निदेशक (डीएचई) के पद सृजन और उसके प्रशासनिक ढांचे पर भी सवाल खड़े किए गए. शिक्षकों ने तर्क दिया कि विश्वविद्यालय स्तर पर पहले से ही कुलपति और कुलसचिव (रजिस्ट्रार) जैसी वैधानिक व्यवस्थाएं प्रभावी ढंग से कार्यरत हैं, ऐसे में डीएचई पद की आवश्यकता और औचित्य समझ से परे है. इसके साथ ही कुलसचिव द्वारा सीधे डीएचई को रिपोर्ट किए जाने की प्रस्तावित व्यवस्था को भी शिक्षकों ने गैर-तार्किक बताते हुए इसमें व्यावहारिक संशोधन करने की मांग रखी.
अवकाश नियमों की जटिलता और लोकतांत्रिक विमर्श की वकालत
शिक्षकों ने प्रमोशन के नियमों के साथ-साथ कम्यूटेड लीव, कैजुअल लीव (सीएल) और पैटर्निटी लीव (पितृत्व अवकाश) सहित अन्य छुट्टियों से जुड़ी शर्तों में किए गए बदलावों पर भी असंतोष व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि कई अतिरिक्त शर्तें जोड़कर पूरी अवकाश प्रक्रिया को जटिल और अव्यावहारिक बना दिया गया है. संघ ने मांग उठाई कि विश्वविद्यालयों और शिक्षकों के हित से जुड़े इतने बड़े नीतिगत बदलावों को धरातल पर उतारने से पहले शिक्षक संगठनों और विश्वविद्यालय समुदाय के सभी हितधारकों के साथ व्यापक व सार्थक विचार-विमर्श किया जाना अनिवार्य है.
इस बैठक में गया कॉलेज शिक्षक संघ की अध्यक्ष प्रो. विभा सिंह, सचिव डॉ. आनंद कुमार, कोषाध्यक्ष डॉ. पन्ना लाल, कार्यकारिणी सदस्य डॉ. मार्कंडेय पांडे, डॉ. अनूप कुमार, परीक्षा नियंत्रक डॉ. सोमनाथ तथा पीआरओ डॉ.
