Tax Audit 2026 Deadline : गया जी शहर के काशीनाथ मोड़ स्थित एक निजी होटल में टैक्स ऑडिट को लेकर सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें जिले के चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को टैक्स ऑडिट की प्रक्रिया, आयकर कानून में हुए बदलाव, टर्नओवर से संबंधित आवश्यक जानकारी और ऑडिट रिपोर्ट ऑनलाइन दाखिल करने की प्रक्रिया के बारे में बताया गया. कार्यक्रम में पूर्व रीजनल काउंसिल सदस्य मनीषा बियानी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं.
30 सितंबर तक टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करना जरूरी
सेमिनार को संबोधित करते हुए मनीषा बियानी ने कहा कि टैक्स ऑडिट से जुड़े कारोबारियों और पेशेवरों के लिए समय-सीमा का विशेष ध्यान रखना जरूरी है. 30 सितंबर तक निर्धारित मामलों में टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करनी होती है.
कंपनी, पार्टनरशिप फर्म और प्रोपराइटरशिप फर्म समेत अन्य निर्धारित श्रेणी के ऐसे व्यवसाय, जिनका टर्नओवर आयकर कानून में निर्धारित सीमा से अधिक है, उनके लिए ऑडिट की आवश्यकता हो सकती है.
उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से सेमिनार का आयोजन किया गया, ताकि चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को टैक्स ऑडिट में होने वाले बदलावों की सही जानकारी मिल सके और वे अपने क्लाइंट की रिपोर्ट को नए प्रावधानों के अनुरूप तैयार कर सकें.
दस्तावेजों और आंकड़ों की अच्छी तरह जांच जरूरी
सीए साक्षी सिंह ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 से संबंधित टैक्स ऑडिट की प्रक्रिया मौजूदा लागू प्रावधानों के अनुसार ही होगी, जबकि अगले वर्षों में नए आयकर प्रावधानों के अनुरूप कई बदलाव देखने को मिलेंगे.
उन्होंने कहा कि आईटीआर दाखिल करने के समय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स पर काम का काफी दबाव रहता है, ऐसे में पुराने दस्तावेज, पुराने प्रारूप या पुरानी जानकारी गलती से अपलोड होने की संभावना बनी रहती है.
इसलिए हर रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले नए प्रावधानों के अनुरूप दस्तावेजों और आंकड़ों की अच्छी तरह जांच करना जरूरी है. सेमिनार में टैक्स ऑडिट के साथ-साथ आईटीआर अपलोड करने की प्रक्रिया और रिपोर्ट को सही तरीके से दाखिल करने के बारे में भी जानकारी दी गई.
देरी से रिपोर्ट दाखिल करने पर लगेगा शुल्क
सीए सह कन्वेनर दीपक कुमार ने कहा कि टैक्स ऑडिट की समय-सीमा और देरी से संबंधित प्रावधानों को लेकर व्यापारियों को विशेष रूप से जागरूक रहने की जरूरत है.
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उन्होंने कहा कि यदि 30 सितंबर के बाद अपडेट कराने में देरी होती है, तो फीस का प्रावधान किया गया है. एक महीने तक देरी होने पर 75,000 रुपये की फीस जमा करनी होगी, जबकि इसके बाद अपडेट कराने पर डेढ़ लाख रुपये तक फीस लग सकती है.
सेमिनार में कई प्रमुख सीए रहे उपस्थित
कार्यक्रम में इनके अलावा डॉ. आलोक सिंह, रोहित गोस्वामी, ज्ञान प्रकाश, विजय कुमार, शशांक कुमार सहित कई अन्य चार्टर्ड अकाउंटेंट मौजूद थे.
