धनबाद मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) को टनकुप्पा क्षेत्र के ग्रामीणों ने एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर रेलवे लाइन के दोनों ओर बसे गांवों की वर्षों पुरानी समस्याओं के समाधान की मांग की है.
ज्ञापन में सबसे प्रमुख मांग वंशीनाला और टनकुप्पा स्टेशन के बीच किलोमीटर 446/03 से 446/07 के बीच अंडरपास पुल (अंडर ब्रिज) के निर्माण की है. ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल बनने से हजारों लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी और आए दिन होने वाली रेल दुर्घटनाओं पर रोक लगेगी.
ज्ञापन के माध्यम से गया-धनबाद ग्रैंड कॉर्ड रेल संघर्ष समिति टनकुप्पा के अध्यक्ष नंदलाल मांझी सहित ग्रामीण अनूप कुमार, रामाधीर कुमार, जागेसर यादव और संतोष कुमार ने टनकुप्पा रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधाओं का भी मुद्दा प्रमुखता से उठाया.
ग्रामीणों ने कहा कि स्टेशन पर अभी भी कई बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. उन्होंने आरक्षित टिकट प्रणाली शुरू करने, यात्रियों के लिए पर्याप्त प्रतीक्षालय बनाने, स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने, रात के समय बेहतर प्रकाश व्यवस्था करने तथा ऊंचे प्लेटफॉर्म का निर्माण कराने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि इन सुविधाओं के अभाव में प्रतिदिन यात्रियों, महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने मंडल रेल प्रबंधक से आग्रह किया है कि टनकुप्पा क्षेत्र की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द अंडरपास पुल निर्माण, ट्रेनों के ठहराव और स्टेशन विकास संबंधी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाए.
सात से अधिक गांवों की जीवनरेखा है यह रेलवे क्रॉसिंग
गया-धनबाद ग्रैंड कॉर्ड रेल संघर्ष समिति टनकुप्पा के अध्यक्ष ई. नंदलाल मांझी सहित ग्रामीण अनूप कुमार, रामाधीर कुमार, जागेसर यादव, संतोष कुमार, तिलसक मांझी व अन्य ग्रामीणों ने कहा कि कैलुडीह, मिसिरचक, जोरवरचक, सोनारखाप, मनकडिहा, परसावां सहित आसपास के कई गांवों के लोगों को अस्पताल, थाना, प्रखंड कार्यालय, विद्यालय, बाजार और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए प्रतिदिन रेलवे ट्रैक पार करना पड़ता है.
क्षेत्र में रेलवे लाइन के कारण सड़क संपर्क विकसित नहीं हो सका है, जिससे लोगों के पास ट्रैक पार करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता. ग्रामीणों का कहना है कि देश की आजादी के 78 वर्ष बाद भी इस क्षेत्र में सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था नहीं होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. हर दिन सैकड़ों महिलाएं, बुजुर्ग, छात्र और किसान जान जोखिम में डालकर रेलवे लाइन पार करते हैं.
रेल हादसों ने छीने कई परिवारों के सहारे
ज्ञापन में ग्रामीणों ने कई दुर्घटनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान कई लोगों की जान जा चुकी है. सबसे दर्दनाक घटना 6 अगस्त 2025 की बताई गई है, जब ग्राम कैलुडीह निवासी 55 वर्षीय मोहन यादव और उनकी 50 वर्षीया पत्नी तिलिया देवी अस्पताल जाने के दौरान ट्रेन की चपेट में आ गए थे. दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी.
इस हादसे के बाद उनके छोटे-छोटे बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया. ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं और यदि जल्द कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो भविष्य में भी निर्दोष लोगों की जान जाती रहेगी.
सरकारी जमीन उपलब्ध, भूमि अधिग्रहण की जरूरत नहीं
ग्रामीणों ने रेलवे प्रशासन को यह भी बताया कि प्रस्तावित अंडरपास स्थल के दोनों ओर बिहार सरकार की पर्याप्त सरकारी भूमि उपलब्ध है. इसलिए पुल निर्माण के लिए किसी भी व्यक्ति की निजी जमीन का अधिग्रहण करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी.
इससे परियोजना बिना किसी विवाद के शीघ्र पूरी की जा सकती है. ग्रामीणों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि सामाजिक और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति दी जाए.
टनकुप्पा स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव की मांग
ज्ञापन में ग्रामीणों ने टनकुप्पा स्टेशन पर महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव की भी मांग उठाई है. ग्रामीणों ने कहा कि बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन गया, कोडरमा, नवादा, राजगीर और अन्य स्थानों की यात्रा करते हैं, लेकिन प्रमुख ट्रेनों के नहीं रुकने से उन्हें काफी परेशानी होती है.
ग्रामीणों ने ट्रेन संख्या 13234 व 13233 कोडरमा-पटना इंटरसिटी एक्सप्रेस का टनकुप्पा स्टेशन पर ठहराव सुनिश्चित करने की मांग की है. इसके साथ ही 63384 व 63383 वैशाली-राजगीर पैसेंजर के नियमित ठहराव की भी मांग रखी गई है, ताकि स्थानीय यात्रियों को बेहतर रेल सुविधा मिल सके.
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