Gaya Ji News(नवीन कुमार मिश्रा): करीब 22 वर्ष पुराने मारपीट के एक मामले में सोमवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए न्यायिक दंडाधिकारी अहसन रशीद की अदालत ने छह नामजद आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया. अदालत के इस निर्णय के साथ वर्ष 2004 से लंबित चल रहे मुकदमे का निष्पादन हो गया.
विवाद ने लिया हिंसक रूप
जानकारी के अनुसार, बाराचट्टी थाना कांड संख्या 24/04 में गजरागढ़ गांव, थाना मोहनपुर निवासी राजेश यादव, अनिल यादव, नीरज यादव, वीरेंद्र यादव, अरविंद यादव एवं टोनी उर्फ प्रकाश को आरोपी बनाया गया था. अभियोजन पक्ष के मुताबिक 26 फरवरी 2004 की शाम करीब साढ़े सात बजे ग्राम बाजू खुर्द निवासी मुजफ्फर खान सर्कस देखने गए थे. इसी दौरान किसी बात को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ और मारपीट की घटना हुई, जिसमें सूचक सहित अन्य लोगों के घायल होने का आरोप लगाया गया था.
मामले में पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज कर जांच के बाद आरोप पत्र न्यायालय में समर्पित किया गया था. इसके बाद वर्षों तक अदालत में सुनवाई चलती रही. सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए गए.
पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने की वजह से बरी
बचाव पक्ष के अधिवक्ता सुनील दत्ता ने अदालत के समक्ष कहा कि आरोपों को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं. वहीं सरकार की ओर से लोक अभियोजक विश्वजीत प्रसाद ने पक्ष रखा. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने तथा उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद न्यायिक दंडाधिकारी अहसन रशीद ने फैसला सुनाया. अदालत ने माना कि आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके हैं. इसके आधार पर सभी छह आरोपियों को दोषमुक्त करते हुए बरी करने का आदेश दिया गया.
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