गया जी: शेरघाटी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, मार्च से ठप है सिजेरियन सेवा

Sherghati Hospital Doctors Shortage: शेरघाटी अनुमंडल अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हैं. मार्च से सिजेरियन ऑपरेशन बंद है और मरीजों को रेफर किया जा रहा है.

गया जी से नीरज की रिपोर्ट
Sherghati Hospital Doctors Shortage:
गया जी जिले के शेरघाटी अनुमंडल अस्पताल सह ट्रॉमा सेंटर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं. अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ और रेडियोलॉजिस्ट के पद रिक्त हैं. इसका असर न केवल शेरघाटी बल्कि आसपास के क्षेत्रों और झारखंड से आने वाले मरीजों पर भी पड़ रहा है.

विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा शेरघाटी अस्पताल

शेरघाटी अनुमंडल अस्पताल सह ट्रॉमा सेंटर लंबे समय से विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी का सामना कर रहा है. अस्पताल में कई महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं, जिससे मरीजों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं समय पर नहीं मिल पा रही हैं. इसका प्रभाव लाखों लोगों पर पड़ रहा है, जो इलाज के लिए इस अस्पताल पर निर्भर हैं.

मार्च से बंद है सिजेरियन ऑपरेशन सेवा

अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण मार्च महीने से सिजेरियन ऑपरेशन पूरी तरह बंद है. अस्पताल में कार्यरत स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रजनी के तबादले के बाद यह स्थिति बनी हुई है. इसके कारण गर्भवती महिलाओं को गया स्थित मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल या निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है.

आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर बढ़ा बोझ

सिजेरियन सुविधा बंद होने का सबसे अधिक असर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर पड़ रहा है. सरकारी अस्पताल में उपलब्ध सुविधा नहीं मिलने के कारण कई परिवारों को निजी अस्पतालों में अधिक खर्च करना पड़ रहा है.

हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं होने से बढ़ी परेशानी

अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ का पद भी रिक्त है. इसके कारण सड़क दुर्घटना और हड्डी संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को पर्याप्त इलाज नहीं मिल पा रहा है.
राष्ट्रीय राजमार्ग-19 के किनारे स्थित होने के कारण यहां सड़क हादसों के घायल मरीज बड़ी संख्या में पहुंचते हैं. लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने से अधिकांश मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर करना पड़ता है.

नेत्र रोग और जांच सेवाएं भी प्रभावित

अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ और रेडियोलॉजिस्ट के पद भी खाली हैं. इससे मरीजों को आंखों के इलाज और आवश्यक जांच के लिए निजी क्लीनिकों या अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ता है.
इससे मरीजों का समय और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं.

13 चिकित्सक तैनात, फिर भी कई सेवाएं बाधित

अस्पताल में कुल 13 चिकित्सकों की तैनाती है. बावजूद इसके विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण कई आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हैं. विशेषज्ञ विभागों में डॉक्टर नहीं होने से मरीजों को अपेक्षित उपचार नहीं मिल पा रहा है.

कमरों की कमी भी बनी चुनौती

अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. उदय कुमार ने बताया कि हड्डी, आंख और गायनी विभाग में चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को वापस लौटाना पड़ता है. उन्होंने यह भी बताया कि अस्पताल में कमरों की कमी है, जिससे मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

स्थानीय लोगों ने उठाई मांग

स्थानीय लोगों ने अस्पताल भवन की मरम्मत, जर्जर पुराने भवन को हटाकर नए भवन के निर्माण तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की जल्द नियुक्ति की मांग की है. लोगों का कहना है कि इससे क्षेत्रवासियों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी.

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Published by: Sakshi kumari

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