Gaya Ji News : गया जी जिले के फतेहपुर प्रखंड में ढाढर नदी के किनारे स्थित संडेश्वर धाम सावन माह में भगवान शिव के भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है. सावन के प्रत्येक सोमवार को यहां बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और नेपाल तक से हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं. पूरा धाम 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयघोष से गूंज उठता है.
सावन के सोमवार को उमड़ती है श्रद्धालुओं की भारी भीड़
मंदिर समिति के अनुसार, सावन के प्रत्येक सोमवार को करीब 30 से 40 हजार श्रद्धालु संडेश्वर धाम पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग जाती हैं. भक्त भगवान शिव से परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं.
सांडे ऋषि के नाम पर पड़ा संडेश्वर धाम का नाम
जयपुर पंचायत के मुखिया राजू यादव ने बताया कि संडेश्वर धाम का नाम सांडे ऋषि के नाम पर पड़ा है. इस धाम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां सामान्य शिवलिंग के बजाय धरती के भीतर से भगवान शिव की दिव्य आकृति प्रकट होने की मान्यता है. यही कारण है कि इस मंदिर की धार्मिक पहचान अन्य शिव मंदिरों से अलग मानी जाती है.
गाय के थन से स्वतः निकलती थी दूध की धार
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, प्राचीन काल में एक ग्वाले की गाय प्रतिदिन एक निश्चित स्थान पर जाकर खड़ी हो जाती थी और उसके थन से स्वतः दूध की धार निकलने लगती थी. जब ग्वाले ने इसका कारण जानने के लिए गाय का पीछा किया तो उसने यह अद्भुत दृश्य देखा. इसके बाद ग्रामीणों ने उस स्थान की खुदाई कराई, जहां करीब तीन फीट नीचे भगवान शिव की आकृति मिलने की मान्यता है. तभी से उस स्थान पर पूजा-अर्चना शुरू हुई और समय के साथ यह स्थल संडेश्वर धाम के नाम से प्रसिद्ध हो गया.
कई राज्यों और नेपाल से पहुंचते हैं श्रद्धालु
स्थानीय लोगों के अनुसार, संडेश्वर धाम की ख्याति अब केवल गया जिले तक सीमित नहीं है. सावन माह में बिहार के अलावा झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. महाशिवरात्रि सहित अन्य प्रमुख धार्मिक अवसरों पर भी यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर समिति ने पूरी की तैयारी
सावन में बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं. मंदिर परिसर की विशेष साफ-सफाई कराई गई है और श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना व जलाभिषेक में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए समिति के सदस्य लगातार व्यवस्थाओं में जुटे हुए हैं.
स्थानीय लोगों और दानदाताओं के सहयोग से बदला धाम का स्वरूप
ग्रामीणों का कहना है कि संडेश्वर धाम के विकास में स्थानीय लोगों और दानदाताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. मंदिर परिसर में हुए अधिकांश विकास कार्य जनसहयोग से पूरे किए गए हैं. लोगों की आस्था और सहयोग से धाम का स्वरूप लगातार विकसित होता गया और आज यह एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में स्थापित हो चुका है.
वर्ष 2022 में चार करोड़ रुपये की योजना से हुआ सौंदर्यीकरण
संडेश्वर धाम के विकास को वर्ष 2022 में नई गति मिली. तत्कालीन पर्यटन मंत्री सह बोधगया विधायक कुमार सर्वजीत की पहल पर करीब चार करोड़ रुपये की विकास योजना स्वीकृत की गई. इस योजना के तहत विवाह मंडप सहित मंदिर परिसर में सौंदर्यीकरण और विभिन्न आधारभूत सुविधाओं का विकास किया गया. इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने लगीं और धाम का आकर्षण भी बढ़ा.
शिव भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है संडेश्वर धाम
आज संडेश्वर धाम फतेहपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और अन्य राज्यों के शिव भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है. सावन माह में यहां उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ इस बात का प्रमाण है कि ढाढर नदी के तट पर स्थित यह धाम देशभर के शिव भक्तों के बीच अपनी अलग पहचान बना चुका है.
