Pitru Paksha 2026 : गया जी का विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला 2026 इस वर्ष 25 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा. सनातन परंपरा में पितरों का तर्पण और पिंडदान विशेष महत्व रखता है, वहीं ज्योतिष में पितृऋण को बड़ा दोष माना गया है, जिसे जीवन में दुर्भाग्य और कई तरह की परेशानियों का कारण माना जाता है.
एस्ट्रोलॉजिकल पॉइंट के निदेशक डॉ. पीके सिन्हा के अनुसार, पितृऋण से जुड़े दोषों के निवारण के लिए पितृपक्ष में गया जी में पिंडदान और तर्पण का विशेष महत्व है.
पितृदोष के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याएं
उन्होंने बताया कि इस दोष के कारण रोजी-रोजगार की अवनति, विवाह बाधा, अविवाहित होना, संतान न होना, पुत्र सुख का अभाव, अन्न-धन का अभाव, मानसिक अशांति, आकस्मिक संकट एवं रोग आदि होता है. इसलिए पितृदोष होने के कारण ग्रहों की अशुभ फलप्रद स्थिति के अनुसार शांति करानी चाहिए.
गया जी धाम और फल्गु नदी का महत्व
उन्होंने बताया कि गयाजी धाम में पितरों के नाम और गोत्र का संकल्प लेकर श्रद्धा के साथ पिंडदान करने की विशेष मान्यता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां विधि-विधान से पिंडदान और तर्पण करने से पितरों को अक्षय लोक की प्राप्ति होती है.
फल्गु नदी के तट पर पितरों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध करना शास्त्रों में श्रेष्ठ माना गया है. इसी कारण पितृपक्ष के दौरान गयाजी में पिंडदान के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
तिथि अनुसार श्राद्ध करने से पूर्ण होती हैं मनोकामनाएं
उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार जिस तिथि को जिनके पूर्वज गमन करते हैं, उस तिथि को उनका श्राद्ध करना चाहिए. इस पक्ष में जो लोग अपने पितरों को जल देते हैं तथा उनकी मृत्यु तिथि पर श्राद्ध करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
Gaya Pitru Paksha Mela 2026 : परिजन की मृत्यु तिथि पता न हो तो इन तिथियों पर कर सकते हैं श्राद्ध
जिन लोगों को अपने परिजन की मृत्यु की तारिख याद नहीं है, वे पितृपक्ष की कुछ विशेष तिथियों पर श्राद्ध और तर्पण कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा, पंचमी, नवमी, एकादशी, द्वादशी, चतुर्दशी और सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या को ऐसी स्थिति में श्राद्ध के लिए विशेष माना गया है.
