गया जी में इस वर्ष 46.96 प्रतिशत ही हुई धान की रोपनी, वर्षा की साल 2023 वाली बनी स्थिति

गया जिले में इस वर्ष बारिश की कमी के कारण धान की रोपनी लक्ष्य के मुकाबले केवल 46.96 प्रतिशत ही हो पाई है. जून से अगस्त तक लगातार सामान्य से कम वर्षापात ने खरीफ फसलों, विशेषकर धान, मड़ुआ और मक्के की बुआई को बुरी तरह प्रभावित किया है.

गया जी जिले में समय पर पर्याप्त मात्रा में बारिश नहीं हुई. मौसम अनुकूल नहीं रहा. ऐसी परिस्थिति में सावन कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि गुजर जाने के बाद भी जिले भर में धान की रोपनी लक्ष्य के विपरीत 46.96 प्रतिशत ही हो पायी है. कृषि विभाग के मुताबिक जिले में 15 अगस्त तक धान की रोपनी की जाती है. देखा जाये, तो एक सप्ताह ही शेष रह गया है. बाकी जिलों में धान की रोपनी लगभग समाप्त हो जाती है, लेकिन यह जिला वर्षा आधारित है है. यहां न कोई बड़ी नहर न ही कोई सिंचाई के अन्य बड़े साधन. बारिश हुई तो छोटे-छोटे ताल-तलैया के भर जाने व बरसाती नदियों में पानी आ जाने से आहर, पइन के माध्यम से थोड़ी बहुत धान की रोपनी हो जाती है.

नगर प्रखंड में सबसे अधिक 71 फीसदी तो नीमचक बथानी में सबसे कम 10 फीसदी ही धान की रोपनी

जिले में धान की रोपनी का लक्ष्य इस वर्ष एक लाख 82 हजार 512 हेक्टेयर में किये जाने के विपरीत सात अगस्त तक महज 85 हजार 699.14 हेक्टेयर में ही की जा सकी है. इसमें सबसे अधिक नगर प्रखंड में 8816.00 हेक्टेयर में धान की रोपनी किये जाने के विपरीत 6315.80 हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपनी की जा सकी है. इनका प्रतिशत 70.8 है जबकि जिले में सबसे कम नीमचक बथानी प्रखंड में लक्ष्य 5080.00 के विपरीत महज 522.00 हेक्टेयर में यानी 10.3 प्रतिशत ही धान की रोपनी हो पायी है.

इसी तरह खरीफ फसलों में जिले में मक्के की बुआई 92.4 फीसदी में बीज बोने का लक्ष्य 7602.77 हेक्टेयर के विपरीत 7026.90 हेक्टेयर में की गयी है. इसी तरह मड़ुआ महज 40.04 फीसदी में रोपाई की गयी है. इसका लक्ष्य 1107.42 हेक्टेयर के विपरीत 443.40 हेक्टेयर में ही की जा सकी है. अन्य मिलेट्स (मोटे अनाज) भी महज अब तक 33.10 प्रतिशत ही की जा सकी है. इनमें 1316.96 हेक्टेयर के विपरीत अब तक 435.93 हेक्टेयर में की जा सकी है.

जून से अब तक सभी महीने में सामान्य से कम हुआ वर्षापात

मौसम विभाग व सांख्यिकी विभाग से वर्षापात की रिपोर्ट पर गौर करें तो जून माह 140.70 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी जिसके विपरीत महज 28.11 मिलीमीटर ही बारिश हो पायी. जुलाई माह 289.20 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी जिसके विपरीत 171.45 मिलीमीटर ही बारिश हुई थी. अगस्त माह में 248.7 मिलीमीटर बारिश की आवश्यकता के विपरीत सात अगस्त तक 63.95 मिलीमीटर बारिश हुई है. प्रखंड के हिसाब से देखें तो अगस्त माह में सबसे अधिक 58.8 मिलीमीटर मोहनपुर में, इमामगंज में 49.2 मिलीमीटर, मानपुर में 37.0 मिलीमीटर तो चौथे नंबर पर बेलागंज में 19.2 मिलीमीटर बारिश हुई जबकि वजीरगंज, नीमचक बथानी प्रखंड में शून्य मिलीमीटर वर्षा हुई तो आमस में 1.0 मिलीमीटर, गुरारू में 1.6 मिलीमीटर, परैया में 3.4 मिलीमीटर बारिश हुई है.

पिछले तीन वर्षों का जून, जुलाई व अगस्त माह के वर्षापात का मिलीमीटर में आंकड़ा इस प्रकार है -

वर्ष जूनजुलाईअगस्त
202628.11171.4563.95
2025202.16342.30241.75
202471.30218.90389.68
202338.50148.50180.21

इन आंकड़ों पर नजर डालें, तो इस वर्ष 2023 की जैसी बारिश की स्थिति है. ऐसे में धान की रोपनी काफी प्रभावित हो रही है. साथ ही अन्य खरीफ फसलें जैसे मड़ुआ व अन्य मिलेट्स की रोपाई व बुनाई की स्थिति काफी अच्छी नहीं है. तेलहन की स्थिति भी काफी चिंताजनक है. साथ ही दलहनी फसलों का हाल भी काफी अच्छा नहीं है.


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By Kanchan kr sinha

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