Gaya News (गया से जितेन्द्र मिश्रा की रिपोर्ट): मोक्ष की धरती गया जी में इन दिनों अध्यात्म के साथ-साथ रियल एस्टेट का बाजार भी चर्चा के केंद्र में है. विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर और ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप की घोषणा ने शहर के जमीन बाजार में भूचाल ला दिया है. मंदिर के आसपास और प्रस्तावित टाउनशिप वाले इलाकों में जमीनों की कीमतें रातों-रात दोगुनी से भी ज्यादा हो गई हैं. हालत यह है कि जिस जमीन की कीमत कुछ महीने पहले 30 से 35 लाख रुपये प्रति कट्ठा थी, उसके लिए अब खरीदार 70 से 75 लाख रुपये देने को तैयार हैं.
विस्थापन का डर और सुरक्षित आशियाने की तलाश
इस बेतहाशा तेजी का सबसे बड़ा कारण विष्णुपद कॉरिडोर का प्रस्तावित निर्माण है. वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर होने वाले इस विकास कार्य में सैकड़ों पुराने मकानों और ढांचों के हटने की संभावना है. इसी विस्थापन के डर से मंदिर के पुजारी और पंडा समाज ने अभी से सुरक्षित ठिकानों की तलाश शुरू कर दी है. नैली, दुबहल, बाइपास और केंदुई जैसे इलाकों में पंडा समाज द्वारा भारी कीमत चुकाकर जमीनों की एडवांस बुकिंग की जा रही है. खरीदार मुंहमांगी कीमत दे रहे हैं, जिससे बाजार में एक कृत्रिम तेजी देखी जा रही है।
सरकारी बैन का तोड़, पोस्ट-डेटेड एग्रीमेंट का नया खेल
हैरानी की बात यह है कि ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के लिए चिह्नित 22,200 एकड़ जमीन पर प्रशासन ने 31 मार्च 2027 तक खरीद-बिक्री और निर्माण पर सख्त रोक लगा रखी है. लेकिन, जमीन कारोबारी और निवेशक इस बैन का तोड़ निकाल चुके हैं. लोग आपसी विश्वास के आधार पर भारी एडवांस या पूरा पैसा देकर पोस्ट-डेटेड इकरारनामा (एग्रीमेंट) करवा रहे हैं. वार्ड नंबर 44 और आसपास के क्षेत्रों में यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है, जहां एग्रीमेंट की अवधि दो साल बाद की रखी जा रही है.
कॉरिडोर का ब्लूप्रिंट, 694 स्ट्रक्चर से बदलेगी गया की सूरत
विष्णुपद मंदिर क्षेत्र के विकास के लिए जो ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है, उसके तहत पूरे इलाके में 694 नए स्ट्रक्चर विकसित किए जाने हैं. इनमें आधुनिक कमर्शियल शॉप, मल्टी-लेवल पार्किंग और पिंडदानियों के लिए हाई-टेक शेड्स शामिल हैं. साथ ही, फल्गु नदी घाट का सौंदर्गीकरण और सीता कुंड क्षेत्र का विस्तार भी इस महापरियोजना का हिस्सा है. इन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के कारण ही शहर के बाहरी इलाकों की जमीनें अब सोने के भाव बिक रही हैं.
निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी, आम आदमी की पहुंच से दूर हुई जमीन
एक तरफ जहां बड़े निवेशक और कारोबारी गया के इस बदलाव को अवसर मान रहे हैं, वहीं आम आदमी के लिए घर बनाना अब एक सपना होता जा रहा है. सैटेलाइट टाउनशिप के कारण स्पेशल एरिया घोषित होने से जमीनों की किल्लत बढ़ गई है. प्रशासन की रोक और बाजार की तेजी के बीच हो रही यह गुप्त सौदेबाजी भविष्य में कानूनी विवादों को भी जन्म दे सकती है, लेकिन फिलहाल गया जी के रियल एस्टेट बाजार में सिर्फ कॉरिडोर और टाउनशिप की ही गूंज है.
