आयकर विभाग के टीडीएस वार्ड गया द्वारा स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) से संबंधित प्रावधानों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा सही एवं समयबद्ध कर अनुपालन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शनिवार को आईएमए हॉल में टीडीएस आउटरीच कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सह मुख्य वक्ता (टीडीएस), बिहार एवं झारखंड आयकर आयुक्त केएल कनक थे.
इस अवसर पर आयकर विभाग की ओर से संयुक्त आयकर आयुक्त (टीडीएस) स्वप्न कुमार चक्रवर्ती, आयकर अधिकारी टीडीएस संजय कुमार, संजय कुमार सुमन, कुमार बृजेन्द्र भी उपस्थित रहे. कार्यक्रम में चैंबर ऑफ कॉमर्स, टैक्सेशन बार एसोसिएशन, बुलियन एसोसिएशन, बुनकर एसोसिएशन तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष, सचिव एवं सदस्यों ने भाग लिया.
इसके अतिरिक्त टीडीएस वार्ड गया के क्षेत्राधिकार में आने वाले विभिन्न सरकारी एवं निजी क्षेत्र के कार्यालयों से जुड़े पदाधिकारी, कर्मचारी व प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे.
आयकर अधिनियम, 2025 से प्रतिभागियों को कराया गया अवगत
सभा को संबोधित करते हुए आयकर आयुक्त केएल कनक ने देश की कर व्यवस्था में टीडीएस प्रणाली के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत टीडीएस से संबंधित प्रमुख नियमों, प्रावधानों तथा आयकर कानून में हाल में हुए महत्वपूर्ण बदलावों आयकर अधिनियम, 2025 से प्रतिभागियों को अवगत कराया. उन्होंने विभिन्न प्रकार के भुगतानों पर टीडीएस की प्रयोज्यता, निर्धारित सीमा, लागू दर, सही समय पर टीडीएस की कटौती एवं उसे सरकारी खाते में जमा करने, पीएएन/टीएएन की सही रिपोर्टिंग तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर टीडीएस स्टेटमेंट दाखिल करने के महत्व को विस्तार से समझाया.
निर्धारित समय में टीडीएस स्टेटमेंट दाखिल नहीं करने पर वसूला जा सकता है विलंब शुल्क व जुर्माना
उन्होंने बताया कि टीडीएस संबंधी प्रावधानों के अनुपालन में चूक के वित्तीय एवं कानूनी परिणाम हो सकते हैं. निर्धारित समय पर टीडीएस नहीं काटने पर सामान्यतः एक प्रतिशत प्रति माह अथवा माह के भाग के लिए ब्याज तथा टीडीएस काटने के बाद उसे निर्धारित समय पर सरकारी खाते में जमा नहीं करने पर 1.5 प्रतिशत प्रति माह अथवा माह के भाग के लिए ब्याज देय हो सकता है.
इसी प्रकार निर्धारित समय में टीडीएस स्टेटमेंट दाखिल नहीं करने पर विलंब शुल्क तथा परिस्थितियों के अनुसार अन्य दंडात्मक प्रावधान भी लागू हो सकते हैं. प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि टीडीएस स्टेटमेंट में में सही पीएएन एवं अन्य आवश्यक विवरण दर्ज करना अत्यंत महत्वपूर्ण है.
टीडीएस से संबंधित व्यावहारिक समस्याएं व प्रश्नों का विभाग ने किया समाधान
कार्यक्रम के दौरान संवादात्मक सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न सरकारी एवं निजी क्षेत्र के डीडीओएस, व्यापारिक एवं पेशेवर संगठनों के प्रतिनिधियों तथा अन्य प्रतिभागियों ने टीडीएस से संबंधित व्यावहारिक समस्याएं एवं प्रश्न रखे. जिसपर आयकर विभाग के अधिकारियों द्वारा उनकी शंकाओं एवं प्रश्नों का समाधान किया गया. कार्यक्रम का समापन स्वैच्छिक कर अनुपालन को बढ़ावा देने तथा आयकर विभाग एवं विभिन्न हितधारकों के बीच बेहतर संवाद एवं समन्वय स्थापित करने के संदेश के साथ हुआ.
