Gaya News : गया जी जिले के इमामगंज प्रखंड के सिद्धपुर पंचायत अंतर्गत अलीनगर गांव के एक युवक और उसके जीजा की दिल्ली में हुए दर्दनाक हादसे में मौत हो गयी. दोनों युवक दिल्ली में रहकर स्लीपर का काम करते थे.
हादसे के बाद दोनों को गंभीर अवस्था में दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती कराया गया था. जहां उपचार के दौरान छह सितंबर को दोनों की मृत्यु हो गयी. दोनों के शव एंबुलेंस से उनके घर लाए गए. जिसके बाद गांव में शोक की लहर दौड़ गई.
कमरे में खाना खाने के बाद सोए थे दोनों
जानकारी के अनुसार तीन सितंबर को पंकज कुमार और उनके जीजा राजेंद्र राम दिल्ली में ड्यूटी से वापस अपने कमरे पर पहुंचे थे. दोनों ने खाना बनाया और खाना खाने के बाद सो गये. परिजनों के अनुसार इसी दौरान गैस रिसाव के कारण कमरे में आग लग गयी और गैस सिलेंडर में विस्फोट हो गया.
हादसे में दोनों गंभीर रूप से झुलस गये. इसके बाद दोनों को उपचार के लिए दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों के प्रयास के बावजूद दोनों की जान नहीं बच सकी और छह सितंबर को उनकी मृत्यु हो गयी.
पलामू के राजेंद्र राम व इमामगंज के पंकज कुमार की पहचान
मौत की खबर मिलते ही दोनों के परिवारों में कोहराम मच गया. बाद में एंबुलेंस से दोनों के शव उनके घर लाये गये. राजेंद्र राम, पिता जगलाल दास, पलामू जिले के रहने वाले थे. जबकि उनके साले पंकज कुमार, पिता परमेश्वर दास इमामगंज प्रखंड के सिद्धपुर पंचायत अंतर्गत अलीनगर के निवासी थे.
स्थानीय स्तर पर रोजगार देने की उठी मांग
पंकज कुमार के पिता परमेश्वर दास ने बेटे की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनका बेटा तो अब इस दुनिया में नहीं रहा. लेकिन सरकार को इस क्षेत्र में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने चाहिए.
Also Read : गया जी : खेत में फसल की जगह उगी काश, सिंचाई के अभाव में किसान जमीन बेचने को मजबूर
यदि स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजी-रोजगार मिलेगा तो उन्हें अपने परिवार का पेट पालने के लिए दिल्ली और दूसरे प्रदेशों में जाने की मजबूरी नहीं होगी. वहीं पंकज कुमार की मां को लकवा मार चुका है और वह बोल भी नहीं पाती है. जवान बेटे की मौत ने परिवार के दुख को और बढ़ा दिया है.
तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर थे राजेंद्र राम
बताया गया कि राजेंद्र राम अपने तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर थे. उनकी मौत की खबर के बाद उनके परिजनों और रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल है. यह दर्दनाक घटना एक बार फिर रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाने वाले परिवारों की मजबूरी और स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने की आवश्यकता को सामने लाती है.
