Gaya में छात्र ने रची खुद के अपहरण की साजिश, पुलिस ने ऐसे किया मामले का भंडाफोड़

Gaya: गया में किडनैपिंग केस को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. तीन दिसंबर को जिले के विष्णुपद थाने में एक छात्र के पिता ने अपहरण को लेकर आवेदन दिया था.

Gaya: बिहार के गया में पुलिस ने अपहरण केस को लेकर बड़ा खुलासा किया है. बीते 3 दिसंबर को एक छात्र के पिता ने अपने बेटे के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी. पुलिस ने छात्र को ना सिर्फ बिल्कुल सही हालत में बरामद किया है बल्कि मामले को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है.  गया टाउन एएसपी पीएन साहू ने इस मामले को लेकर बताया कि छात्र के पिता ने बेटे के अपहरण को लेकर आवेदन किया था. उन्होंने कहा था कि फिरौती में 1 लाख 50 लाख रुपये की मांग की जा रही है. पैसा नहीं देने पर हत्या की धमकी दी जा रही है. इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की.

छात्र सकुशल बरामद

शिकायत के बाद गया पुलिस हरकत में आ गई. एसएसपी आशीष भारती ने छात्र को सकुशल बरामद करने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया. सीसीटीवी फुटेज को खंगाला गया. फोन ट्रेस किया गया.  इसके बाद विशेष टीम ने शहर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के एक मॉल से बच्चे को सकुशल बरामद किया. छात्र से जब पूछा गया तो उसने बताया कि वह दोस्त के साथ पंतनगर में स्थित एक किराए के मकान में रहकर पढ़ाई करता है. उसे ऑनलाइन गेम खेलने के शौक था. इसी क्रम में उसने कुछ दोस्तों से कर्ज लिया था और वह हार गया.

खुद रची साजिश

ऑनलाइन गेम में पैसा हारने के कारण वह काफी परेशान था. कर्ज चुकाने के लिए उसके दोस्त उसे परेशान कर रहे थे. इसी कर्ज को चुकाने के लिए छात्र ने खुद के अपहरण की साजिश रची. पुलिस ने बताया कि छात्र के दोस्त ने फोन कर उसके परिजन से डेढ़ लाख रुपये की फिरौती मांगी. इसके बाद छात्र दोस्त के साथ पटना आ गया. फिरौती मांगने पर परिजन डर गए और उन्होंने 95 हजार रुपया उसके दोस्त के अकाउंट में डाल भेज दिया. अकाउंट में पैसा आते ही छात्र ने 55000 रुपया निकालकर दोस्त को दे दिया. इसके बाद पुलिस को छात्र के दोस्त का लोकेशन पता चल गया. फिर पुलिस ने छात्र के नाबालिग दोस्त को पकड़ा. पुलिस ने दोनों को साथ में लेकर पूछताछ की तब उन्होंने ने इस कांड का खुलासा किया. 

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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