Gaya News: (गया से रोशन की रिपोर्ट) जिले के डुमरिया, इमामगंज और बांके बाज़ार समेत नवादा व जहानाबाद क्षेत्रों में जल संकट और गिरते जलस्तर को खत्म करने के लिए ‘नदी से नदी जोड़ो आंदोलन’ तेज हो गया है. पूर्व मुखिया अशोक सिंह के नेतृत्व में कई वर्षों से चल रहे इस अभियान को अब नई राजनीतिक और सामाजिक ताकत मिलने लगी है. दावा किया जा रहा है कि मात्र 40 किलोमीटर खुदाई से पूरे इलाके की नदियों में सालभर पानी बह सकता है.
सोन नदी के ओवरफ्लो पानी से भरेंगी सूखी नदियां
आंदोलनकारियों का कहना है कि झारखंड के पलामू जिले के हुसैनाबाद के पास इंद्रपुरी डैम का पानी सोन नदी में जाता है. सोन नदी के ओवरफ्लो पानी को सिर्फ 40 किलोमीटर खुदाई कर बिहार के कबिसा गांव के पास सोरहर नदी में गिराना है. ऐसा होते ही डुमरिया, इमामगंज, बांके बाज़ार के साथ नवादा और जहानाबाद की नदियों में सालभर पानी बना रहेगा और जलस्तर मजबूत हो जाएगा.
पूर्व मुखिया अशोक सिंह के नेतृत्व में चल रहा बड़ा अभियान
इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर पूर्व मुखिया अशोक सिंह लगातार आंदोलन चला रहे हैं. उनके साथ समाजसेवी शिवशंकर सिंह दांगी, पूर्व प्रमुख रामचंद्र सिंह दांगी, समाजवादी चिंतक एवं शिक्षाविद मिथिलेश सिंह दांगी और अधिवक्ता उपेंद्र नाथ वर्मा भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. सभी ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को आवेदन देकर योजना को धरातल पर उतारने की मांग की है.
नीतीश कुमार भी हो गए थे खुश, बताया था कम लागत वाली योजना
पूर्व मुखिया अशोक सिंह ने इस योजना का आवेदन तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी सौंपा था. बताया जाता है कि आवेदन पढ़कर नीतीश कुमार काफी खुश हुए थे और इसे कम लागत वाली महत्वाकांक्षी योजना बताया था. उन्होंने तत्काल केंद्र सरकार को पत्र लिखकर इस परियोजना पर शीघ्र काम शुरू कराने का अनुरोध भी किया था.
दो राज्यों का मामला होने से केंद्र सरकार पर टिकी उम्मीदें
आंदोलनकारियों का कहना है कि यह मामला बिहार और झारखंड, दो राज्यों से जुड़ा हुआ है. इसी कारण इस परियोजना को लागू करने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की बनती है. अब इस योजना को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी औरंगाबाद के लोकप्रिय सांसद अभय कुशवाहा को सौंपी गई है ताकि जल्द से जल्द काम शुरू हो सके.
खेती, जलस्तर और विकास की नई उम्मीद जगी
लोगों का मानना है कि अगर सोन नदी का अतिरिक्त पानी सोरहर नदी में पहुंच गया तो पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है. नदियों में सालभर पानी रहने से खेती को स्थायी लाभ मिलेगा, भूजल स्तर मजबूत होगा और किसानों को सिंचाई संकट से राहत मिलेगी. आंदोलनकारी इसे इलाके के विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम मान रहे हैं.
इस योजना को सफल बनाने में सबको करना होगा सहयोग
आंदोलन से जुड़े लोगों ने कहा है कि यह सिर्फ एक परियोजना नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा अभियान है. इसे सफल बनाने के लिए सरकार, जनप्रतिनिधियों और आम लोगों सभी को मिलकर सहयोग करना होगा.
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