बोधगया. बोधगया स्थित मगध विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा में शोध क्षेत्र की दशा एवं दिशा: एक अवलोकन विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों में शोध की वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन करना तथा भविष्य की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करना था. मुख्य वक्ता वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो किस्मत कुमार सिंह ने भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत, उसकी प्रासंगिकता और समकालीन शोध की दिशा पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने भारतीय और पाश्चात्य दर्शन के तुलनात्मक पक्षों को समझाते हुए पंचमहाभूत, पंचकोश, शब्द प्रमाण और अनुभूति प्रमाण जैसे विषयों को सरल रूप में प्रस्तुत किया. उन्होंने शोधार्थियों को पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक दृष्टिकोण के समन्वय पर बल दिया. विशिष्ट अतिथि मगध विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ गौतम कुमार सिन्हा ने भारतीय ज्ञान प्रणाली के पुनर्स्थापन में युवा शोधकर्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया. कार्यक्रम की अध्यक्षता मगध विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो जावेद अंजुम ने की. उन्होंने विषय की गंभीरता और इसकी शैक्षणिक उपयोगिता पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम का संचालन सीनियर असिस्टेंट प्रो डॉ प्रियंका तिवारी ने किया. इस अवसर पर डॉ रामनारायण मिश्र सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, शोधार्थी कुमार सौरभ, तफसीर आलम, संध्या कुमारी, देव कुमार सिंह, इंद्रजीत कुमार, अथिया शगुफ्ता, नेहा कुमारी आदि मौजूद रहे.
Gaya News : शोधार्थियों को पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक दृष्टिकोण के समन्वय की आवश्यकता

Gaya News : शोधार्थियों को पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक दृष्टिकोण के समन्वय की आवश्यकता
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Gaya News: मगध विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा पर व्याख्यान का आयोजन