गया जी की बेटी बनीं अधिकारी, बताया बिना कोचिंग कैसे क्रैक की BPSC परीक्षा

Success Story : गया जी जिले की आरती कुमारी ने BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में 508वीं रैंक हासिल कर असिस्टेंट प्लानिंग ऑफिसर का पद हासिल किया है. उन्होंने बिना किसी कोचिंग के केवल सेल्फ स्टडी के दम पर यह सफलता हासिल की.

गया जी से तरुणजय कुमार की रिपोर्ट
Success Story :
गया जी जिले की बेटी आरती कुमारी ने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के बल पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में उन्होंने 508वीं रैंक प्राप्त कर असिस्टेंट प्लानिंग ऑफिसर के पद पर सफलता हासिल की है. उनकी इस उपलब्धि से परिवार, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है. वहीं, उनकी सफलता जिले के युवाओं के लिए भी प्रेरणा का विषय बन गई है.

बिना कोचिंग सिर्फ सेल्फ स्टडी के दम पर हासिल किया मुकाम

आरती कुमारी शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी छात्रा रही हैं. बचपन से ही उनका झुकाव शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की ओर रहा. उन्होंने अपने लक्ष्य को स्पष्ट रखते हुए लगातार मेहनत की और कठिन परिस्थितियों में भी अपने प्रयास जारी रखे. उनकी सफलता की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए किसी कोचिंग संस्थान या विशेष प्रशिक्षण का सहारा नहीं लिया.

अपने माता-पिता के साथ आरती कुमारी

पूरी तैयारी उन्होंने सेल्फ स्टडी के माध्यम से की और अपने अनुशासन, नियमित अध्ययन तथा आत्मविश्वास के दम पर यह सफलता प्राप्त की.

रिटायर्ड अधिकारी पिता का मिला मार्गदर्शन

आरती के पिता अक्षय कुमार सिन्हा रिटायर्ड जिला ऑडिट पदाधिकारी हैं. उन्होंने हमेशा अपनी बेटी को शिक्षा के प्रति प्रेरित किया और उसके सपनों को पूरा करने में हर संभव सहयोग दिया. उनकी माता पुतुल सिन्हा गृहिणी हैं, जिन्होंने परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ बेटी के मनोबल को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. आरती का कहना है कि माता-पिता का सहयोग, मार्गदर्शन और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा है.

पढ़ाई करती हुई आरती कुमारी

सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं

BPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता प्राप्त करना आसान नहीं माना जाता. इसके लिए लंबे समय तक निरंतर अध्ययन, सही रणनीति और धैर्य की आवश्यकता होती है. आरती ने इन सभी चुनौतियों का सामना करते हुए अपने लक्ष्य को हासिल किया.

उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि किसी विद्यार्थी में सीखने की इच्छा, मेहनत करने का जज्बा और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो, तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकते.

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महंगे कोचिंग की जरूरत नहीं, सही दिशा जरूरी

आरती कुमारी की उपलब्धि विशेष रूप से उन छात्रों और छात्राओं के लिए प्रेरणादायक है, जो बिना कोचिंग के प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि सफलता केवल महंगे कोचिंग संस्थानों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सही दिशा में की गई मेहनत और आत्मविश्वास से भी बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं.

बधाई देने वालों का लगा तांता

उनकी सफलता पर परिवार, मित्रों, शिक्षकों और शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त किया है. सभी ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है. गया जिले के लोगों को भी अपनी इस प्रतिभाशाली बेटी पर गर्व है, जिसने अपनी मेहनत के बल पर जिले का नाम रोशन किया है.

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लेखक के बारे में

By Kumarsuryakant

सूर्यकांत कुमार तीन वर्षों से हिंदी डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. स्थानीय और हाइपरलोकल पत्रकारिता में विशेष अनुभव रखते हैं. कंटेंट राइटिंग के साथ-साथ वीडियो एडिटिंग और वॉयस ओवर का भी व्यावहारिक अनुभव रखते हैं. उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत एक डिजिटल न्यूज चैनल से की और विभिन्न डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कार्य करते हुए समाचार लेखन और डिजिटल कंटेंट प्रोडक्शन का अनुभव हासिल किया है. इसके अलावा खेल और मनोरंजन से जुड़ी खबरों में भी विशेष रुचि रखते हैं.

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