गया जी़ शहर की चरमराई सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए नगर आयुक्त अभिषेक पलासिया ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. काम में लापरवाही बरतने और मनमानी करने वाले चार वार्डों के जमादारों (सुपरवाइजर) पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें डिमोट कर दिया गया है. इन सभी को उनके मूल पद पर वापस भेज दिया गया है, जिसके बाद अब इन्हें फिर से सफाईकर्मी और नाइट गार्ड के रूप में काम करना होगा. इस सख्त कार्रवाई से निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है. गौरतलब है कि कुछ वर्ष पहले निगम के 53 वार्डों में निगरानी के लिए जमादारों की कमी होने पर, बेहतर काम करने वाले पढ़े-लिखे वार्ड लेबरों को प्रमोट कर जमादार बनाया गया था. लेकिन अब इन्हीं कर्मचारियों को लापरवाही के आरोप में वापस मूल पद पर भेजा गया है. नगर आयुक्त के आदेश के अनुसार, वार्ड 37 के जमादार पर आरोप है कि वे बिना कार्यालय आदेश के दूसरी पाली के मजदूरों से पहली पाली में काम लेते थे और सफाई कार्य में कोई रुचि नहीं दिखाते थे. कार्रवाई के तहत उन्हें वार्ड 51 में सफाईकर्मी के रूप में तैनात किया गया है. इसके अलावा वार्ड 29, 42 और 46 के जमादारों को भी डिमोट कर सफाईकर्मी और नाइट गार्ड के रूप में ड्यूटी पर लगा दिया गया है.
फौज बड़ी, फिर भी एजेंसी और निगम दोनों फेल
शहर की मुख्य 18 सड़कों की सफाई और कचरा उठाव की जिम्मेदारी हाल ही में एक एजेंसी को दी गयी है. इसके अलावा निगम के पास खुद के दो स्वच्छता पदाधिकारी, दो मुख्य सफाई निरीक्षक और कर्मचारियों की एक बड़ी टीम मौजूद है. इसके बावजूद सड़कों पर एजेंसी और निगम के कर्मचारी सिर्फ खानापूर्ति करते नजर आते हैं. कचरा उठने के कुछ देर बाद ही सड़कों पर फिर से गंदगी पसर जाती है. निगम सूत्रों की मानें तो सफाई से जुड़े कई कर्मचारी अपना मूल काम छोड़कर दूसरों के काम में बेवजह दखलंदाजी करते हैं.
वेतन कटने का भी नहीं हो रहा असर
नगर आयुक्त अभिषेक पलासिया ने पदभार ग्रहण करते ही औचक निरीक्षण को अपनी प्राथमिकता बनाया है. इससे पहले भी सफाई से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही पर उनका वेतन रोका जा चुका है और सख्त चेतावनी दी गयी है. नगर आयुक्त के कड़े रुख के बाद कुछ दिनों तक व्यवस्था ठीक रहती है, लेकिन फिर कर्मचारी उसी पुराने ढर्रे पर लौट आते हैं. शहर में रोजाना देश-विदेश से आने वाले पिंडदानियों के मद्देनजर प्रशासन की कोशिश गया को स्वच्छ दिखाने की है, लेकिन निगम कर्मियों की लापरवाही और आम लोगों द्वारा सड़क पर कचरा फेंकने की आदत के कारण यह लक्ष्य दूर ही नजर आ रहा है.
