दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUSB) के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (MMTTC) तथा ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU), दरभंगा के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम (MMTPP) एवं शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की योजना के तहत आयोजित 21वें आठ दिवसीय “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 संवेदीकरण एवं उन्मुखीकरण कार्यक्रम” का शुभारंभ ऑनलाइन माध्यम से हो गया है.
सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह एवं एलएनएमयू के कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों एवं शैक्षणिक संगठनों से 13 राज्यों का प्रतिनिधित्व करते हुए 150 से अधिक प्रतिभागियों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई है.
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि के रूप में कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए. रविंद्रनाथ ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के महत्वपूर्ण विषय “संस्थागत विकास योजना” पर विस्तारपूर्वक अपने विचार व्यक्त किए. उन्होंने 21वीं सदी के शिक्षार्थियों के समग्र विकास की आवश्यकता पर बल देते हुए नवीन शिक्षण-पद्धतियों और मूल्यांकन तकनीकों की भूमिका को रेखांकित किया. अपने व्याख्यान में उन्होंने शैक्षणिक उत्कृष्टता प्राप्त करने हेतु आवश्यक मानकों एवं आयामों की विस्तृत चर्चा की.
उन्होंने संस्थागत, व्यक्तिगत, अवसंरचनात्मक तथा वित्तीय पहलुओं के साथ-साथ संस्थान के लक्ष्य, दृष्टि, मिशन एवं उद्देश्यों के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि स्पष्ट दृष्टि, सुदृढ़ नेतृत्व, सहभागी प्रशासन एवं निरंतर गुणवत्ता सुधार की संस्कृति के माध्यम से ही उच्च शिक्षण संस्थान राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को प्रभावी रूप से साकार कर सकते हैं.
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एक परिवर्तनकारी पहल: कुलपति प्रो. के.एन. सिंह
अध्यक्षीय संबोधन देते हुए सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारत की शिक्षा व्यवस्था को वैश्विक मानकों के अनुरूप रूपांतरित करने की दिशा में एक दूरदर्शी, समावेशी एवं परिवर्तनकारी पहल है. उन्होंने कहा कि यह नीति 21वीं सदी की चुनौतियों, आवश्यकताओं एवं अवसरों को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों में ज्ञान, कौशल, नवाचार, सृजनात्मकता तथा नैतिक मूल्यों के समन्वित विकास का मार्ग प्रशस्त करती है.
उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा परिकल्पित “आत्मनिर्भर भारत” तथा “विकसित भारत @2047” के लक्ष्यों की प्राप्ति में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उत्कृष्ट शोध, नवाचार एवं समाजोन्मुख विस्तार गतिविधियों की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वास्तविक विकास तभी सार्थक है जब समाज के सभी वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित हो तथा प्रगति का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे.
राजनीति विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. जाधव प्रताप सिंह द्वारा सत्र का संचालन किया गया. कार्यक्रम के प्रारंभ में शिक्षक-शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्षा प्रो. मितांजलि साहू ने मुख्य अतिथि, कुलपतियों, विशिष्ट अतिथियों एवं सभी प्रतिभागियों का आभासी मंच पर स्वागत किया.
एमएमटीटीसी, सीयूएसबी के निदेशक एवं कार्यक्रम समन्वयक प्रो. तरुण कुमार त्यागी ने कार्यक्रम का विस्तृत परिचय प्रस्तुत करते हुए इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम के अंत में एलएनएमयू से कार्यक्रम समन्वयक एवं आईक्यूएसी के कोऑर्डिनेटर प्रो. जिया हैदर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया.
