Gaya Ji News : टीबी उन्मूलन अभियान को एक बड़ा जनआंदोलन बनाने की बेहद जरूरत है. जनसहयोग के बिना इस महत्वपूर्ण अभियान को सफल तौर से पूरा नहीं किया जा सकता है. उक्त बातें रेड क्रॉस में एक निजी कंपनी की ओर से टीबी मरीजों को पोषाहार वितरण करने के लिए आयोजित विशेष समारोह को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ. राजाराम प्रसाद ने कही. इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से निजी कंपनी के राकेश कुमार भी मौजूद थे.
दो दिनों में 162 मरीजों को मिला पोषाहार
कंपनी के राकेश कुमार ने कार्यक्रम के दौरान बताया कि शुक्रवार को 80 तथा रविवार को 82 टीबी मरीजों के बीच फूड बास्केट का वितरण किया गया. इसके साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि अन्य बचे हुए फूड बास्केट का वितरण बोधगया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर सोमवार को किया जायेगा. इसके अलावा भी अन्य विभिन्न जगहों पर भी फूड बास्केट का वितरण करने की योजना तैयार की गई है.
टीबी से पीड़ित मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के साथ-साथ निक्षय पोषण योजना के तहत पोषाहार भी उपलब्ध कराया जाता है. टीबी के खिलाफ जंग को मजबूत करने के लिए जनसहयोग आवश्यक है. ऐसे में जरूरी है कि समाज का हर सदस्य आगे बढ़कर टीबी मरीजों की मदद करे. इसी भावना को जाग्रत करने के लिए जिला स्वास्थ्य समिति के समन्वय के साथ रविवार को टीबी मरीजों के बीच फूड बास्केट का वितरण किया गया.
छह माह तक नियमित दवा सेवन करें टीबी मरीज
स्वास्थ्य विभाग के डीपीएम नीलेश कुमार ने मरीजों को जागरूक करते हुए बताया कि टीबी के मरीज नियमित छह माह तक अपनी दवा का सेवन आवश्यक रूप से करें. इलाज के दौरान बीच में ही टीबी की दवा छोड़ देने पर टीबी का असर काफी खतरनाक हो जाता है, जो बाद में एमडीआर (मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट) टीबी में बदल जाता है.
निक्षय योजना मरीजों को पोषण सहायता उपलब्ध कराकर उनके उपचार को प्रभावी बनाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. वहीं, संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि जिला में टीबी के संभावित मरीजों की पहचान और समय पर सटीक इलाज के लिए लगातार स्क्रीनिंग की जा रही है.
वितरण कार्यक्रम में ये सभी रहे मौजूद
इस विशेष पोषाहार वितरण कार्यक्रम में डीपीएम स्वास्थ्य नीलेश कुमार, सीडीओ सह टीबी नोडल अधिकारी डॉ. पंकज सिंह तथा टीबी विभाग से एसटीएस सुनील कुमार, श्रीनिवास दुबे, हिदयातुल्लाह, चंदन कुमार, राहुल कुमार, ललिता कुमारी सहित टीबी के कई लाभार्थी मरीज व उनके परिजन मुख्य रूप से मौजूद थे.
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