Bihar News: बिहार में इस जगह जाने के लिए मृत आत्माओं के नाम से होती है टिकट बुक, बेहद खास है ये कहानी

Bihar News: बिहार में पितृपक्ष मेले की खास अहमियत है. बड़ी संख्या में ना केवल देश बल्कि विदेशों से भी लोग पिंडदान के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में इस खास परंपरा से जुड़ी एक अनोखी कहानी है, जिसे जानकर आप भी हैरान रह जायेंगे….

Bihar News: बिहार के गया जिले का नाम अब बदलकर गयाजी कर दिया गया है. ऐसे में लोग गया जिले के धार्मिक इतिहास से लेकर काफी कुछ रीति-रिवाजों के बारे में सोशल मीडिया पर सर्च कर रहे हैं. ऐसे में गयाजी से ही जुड़ी एक अनोखी कहानी सामने आई है, जो आपको थोड़ा चौंका सकती है. दरअसल, पितृपक्ष मेले के दौरान गयाजी में पिंडदान करने के लिए पिंडदानियों की भारी भीड़ उमड़ती है. इस दौरान पितरों की मोक्ष प्राप्ति के लिए पूरे विधि-विधान से पिंडदान किया जाता है. ऐसे में एक अनोखी कहानी यह है कि, यहां पहुंचने के लिए मृत आत्माओं का ट्रेन या फिर बस में रिजर्वेशन कराया जाता है.

मृत आत्माओं के नाम से टिकट बुकिंग

इस कहानी को लेकर विस्तार रूप से बात की जाए तो, पिंडदानी अपने पितरों के मोक्ष की प्राप्ति के लिए गयाजी पहुंचते हैं. यहां आने वाले पिंडदानी के कंधे पर एक दण्ड में लाल या पीले कपड़े में नारियल बंधा रहता है. उस दण्ड को पितृदंड कहते हैं. पिंडदानी, पितृदण्ड को एक बच्चे की तरह घर से गयाजी लाते हैं. पिंडदानियों की आस्था को इसी बात से समझा जा सकता है कि, वे पितृदंड को बस, ट्रेन या फिर किसी भी वाहन से लाते हैं तो, उनके लिए सीट बुक की जाती है.

तीर्थयात्रियों की आस्था का बड़ा जुड़ाव

कहा जाता है कि, ट्रेन में सीट बुक होने के बाद यदि उस सीट पर कोई नहीं है तो ट्रेन में मौजूद टीटीई दूसरे को सीट दे देते हैं. लेकिन, यहां ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता. यहां टीटीई भी पिंडदानियों की आस्था को समझते और सम्मान करते हैं. साथ ही उस सीट पर पितृदंड लेटे रहते हैं. बता दें कि, इस दौरान कच्चा बांंस का 13 पोर से बने पितृ स्वरूप पितृदंड को लेकर तीर्थयात्रियों की आस्था का बड़ा जुड़ाव है. 

हजारों सालों की परंपरा आज भी कायम

बता दें कि, देश-विदेश से लोग गयाजी में पितृपक्ष मेले के दौरान पितरों की मोक्ष प्राप्ति के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं. मान्यता है कि, गयाजी में मोक्षधाम में पितरों का वास होता है. जो लोग सनातन धर्म को मानते हैं, जिन्हें पितरों में आस्था और श्रद्धा होती है, वे सभी गयाजी श्राद्ध करने आते हैं. पिंडदानी का पूरा कर्मकांड उनके श्रद्धा पर निर्भर होता है. वहीं, हजारों सालों से चलती आ रही गयाजी में पितृदण्ड लाने की परंपरा आज के आधुनिक युग में भी कायम है.

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Author: Preeti Dayal

प्रीति दयाल, प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहीं हैं. यूट्यूब पोर्टल सिटी पोस्ट लाइव से पत्रकारिता की शुरुआत की. इसके बाद डेलीहंट और दर्श न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में काम कर चुकीं हैं. डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग में साढ़े 3 साल का अनुभव है. खबरें लिखना, वेब कंटेंट तैयार करने और ट्रेंडिंग सब्जेक्ट पर सटीक और प्रभावी खबरें लिखने का काम कर रहीं हैं. प्रीति दयाल ने पत्रकारिता की पढ़ाई संत जेवियर्स कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी से की. इस दौरान पत्रकारिता से जुड़ी कई विधाओं को सीखा. मीडिया संस्थानों में काम करने के दौरान डिजिटल जर्नलिज्म से जुड़े नए टूल्स, तकनीकों और मीडिया ट्रेंड्स को सीखा. पहली बार लोकसभा चुनाव 2024 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे बड़े चुनावी कवरेज में काम करने का अवसर मिला. इस दौरान बिहार की राजनीति, चुनावी रणनीतियों, राजनीतिक दलों और प्रमुख नेताओं से जुड़े कई प्रभावशाली और पाठकों की रुचि के अनुसार कंटेंट तैयार किए. चुनावी माहौल को समझते हुए राजनीतिक विश्लेषण और ट्रेंडिंग मुद्दों पर आधारित खबरों को आसान और प्रभावी भाषा में तैयार करना कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है. कंटेंट रिसर्च, SEO आधारित लेखन, सोशल मीडिया फ्रेंडली कंटेंट तैयार करना और तेजी से बदलते न्यूज वातावरण में काम करना प्रमुख क्षमताओं में शामिल है. बिहार की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, सिनेमा और देश-दुनिया की महत्वपूर्ण घटनाओं पर रुचि और समझ है. टीम के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम करना और समय सीमा के अंदर गुणवत्तापूर्ण काम पूरा करना कार्यशैली का हिस्सा है. प्रीति दयाल का उद्देश्य डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में लगातार सीखते हुए अपनी पत्रकारिता कौशल को और बेहतर बनाना और पाठकों तक विश्वसनीय और प्रभावशाली खबरें पहुंचाना है.

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